डीएचएफएल प्रस्ताव: उत्तर प्रदेश के 3000 करोड़ रु. का फिक्स्ड डिपॉजिट दांव पर|

लखनऊ: दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) का चल रहा दिवालियापन प्रस्ताव – जो कि आईबीसी प्रक्रिया से गुजरने वाली पहली वित्‍तीय सेवा कंपनी है – अगले हफ्ते पूरा होने वाला है। डीएचएफएल, नवंबर 2019 से दिवालिया प्रस्ताव की प्रक्रिया में है। दिवालियापन की इस प्रक्रिया से उन लेनदारों को राहत मिलगी, जिनका डीएचएफएल पर 87,000 करोड़ रु. का कर्ज है। इसमें ऐसे 55,000 से अधिक रिटेल ग्राहक व संस्‍थान शामिल हैं, जिनका डीएचएफएल में 5,400 करोड़ रु. फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट है। स्रोतों के अनुसार, इसका लगभग 3,000 करोड़ रु., उत्तर प्रदेश के लोगों व संस्‍थाओं का है।दिसंबर में निविदा प्रक्रिया के पांचवें और आखिरी दौर के समापन के साथ, पीरामल एंटरप्राइजेज और अमेरिका के ओकट्री कैपिटल ने दावा किया है, कि उन्होंने सबसे ऊंची बोली लगायी है, और जो पूर्णत: क्रियान्वयन योग्य हैं। स्रोतों के अनुसार, बोलीदाताओं ने 35,000-37,000 करोड़ रु. की बोली लगायी है। कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (सीओसी) प्रत्येक बोली को गुणात्मक एवं परिमाणात्मक दोनों ही मानकों पर अच्छी तरह से जांच-परख रहा है ,और इसके द्वारा 14 जनवरी को निर्णय लिये जाने का अनुमान है।

कंपनी की ओर से जारी वक्तव्य में कहा गया है, कि पीरामल की बोली में ऋणदाताओं को सबसे अधिक नकद रिकवरी की पेशकश की गयी है, और सीओसी के मूल्यांकन मैट्रिक्‍स में इसे सर्वोच्च अंक प्राप्त है, और यह सभी विनियामक मानकों के अनुरूप भी है। यह पूर्णत: और शीघ्र क्रियान्वित किये जाने योग्‍य है।

इन दोनों बोलीदाताओं द्वारा एफडी धारकों के साथ भिन्न तरह का व्यवहार किया जा रहा है। बोली लगाने के शुरुआती चरण से, पीरामल ने आईबीसी प्रस्ताव के जरिए एफडी धारकों को दिये गये सीओसी ऑफर्स के अलावा अपनी बोली में उन्हें प्रस्ताव प्रक्रिया में अतिरिक्त राशि की पेशकश की है। पीरामल ने सीओसी भुगतानों के अलावा एफडी धारकों को 10 प्रतिशत अधिक भुगतान करने की पेशकश की है।  पीरामल ने अपनी ओर से जारी बयान में कहा कि हमारे प्रत्येक व्यवसाय में हमारे द्वारा दिये जाने वाले सामाजिक योगदान का महत्‍व, पीरामल के डीएनए का एक अभिन्न हिस्‍सा है। पीरामल ने आगे बताया कि डीएचएफएल के रिटेल फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट खाताधारकों की संख्‍या 75,000 से अधिक है, जिनमें से अधिकांश ऐसी सामान्य पृष्ठभूमि से हैं, जिन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई के पैसे बचाकर छोटे-छोटे निवेश किये हैं।पीरामल ने बताया, ‘हमने हमारी निविदा में स्पष्ट रूप से कहा है, कि लेनदार समिति द्वारा फिक्स्ड डिपॉजिट धारकों को की जाने वाली पेशकश के अलावा, हम उन्हें अतिरिक्‍त रूप से 10 प्रतिशत देंगे। हालांकि, हम ऐसा किसी नियम या प्रावधान के तहत नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम इस फ्रेंचाइजी के हट जाने से प्रभावित अधिकांश लोगों के दर्द को साझा करने की कोशिश करते हैं।’ हालांकि आखिरी दौर की बिडिंग में, ओकट्री ने भी ऐसी ही पेशकश है, और दावा किया है कि वो अब तक पीरामल द्वारा वादा किये गये 150 करोड़ रु. के अलावा एफडी धारकों को अलग से 300 करोड़ रु. देंगे। ओकट्री द्वारा दी जाने वाली भुगतान संरचना जटिल है। बोलीदाता ने डीएचएफएल की बीमा सहायक की बिक्री से प्राप्त होने वाली किसी भी आय में से इस राशि का भुगतान करने का वादा किया है। चूंकि ओकट्री एक विदेशी संस्थान है, उन्हें बीमा व्यवसाय के स्वामित्व और बिक्री में गंभीर कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा जो पहले से ही 49% की अधिकतम स्वीकार्य विदेशी स्वामित्व सीमा पर है। इसलिए एफडी धारकों को बीमा कंपनी की लिंक की गई, बिक्री आय से अतिरिक्त राशि का भुगतान करने का उनका प्रस्ताव बेहद अनिश्चित है। इसके विपरीत, पीरामल ने एफडी धारकों को अग्रिम रूप से 150 करोड़ रुपये का नकद भुगतान करने की पेशकश की है।

 

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