Advertisement

खामोशी टूटी, कॉक्लियर इम्प्लांट से मूक बधिर बच्चों की लौटी आवाज

कानपुर नगर।

कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी से मिली नई जिंदगी की सबसे मार्मिक तस्वीर सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में सामने आई, जहां अलसमद, आराध्या मिश्रा, ईमान खान, नायमा सिद्दीकी और मोहम्मद उवैस जैसे बच्चे, जो कभी सुन और बोल नहीं पाते थे, अब अपने माता पिता को ‘मम्मी पापा’ कहकर पुकार रहे हैं। संवाद कार्यक्रम में जैसे ही अभिभावकों ने यह अनुभव साझा किया, सभागार में मौजूद लोग भी भावुक हो उठे।

मोहम्मद उवैस की माता अलसिफा ने बताया कि पहले उनके घर में सन्नाटा था। उवैस हमारी आवाज नहीं सुन पाता था और कोई प्रतिक्रिया नहीं देता था। कॉक्लियर इम्प्लांट के बाद जब उसने पहली बार ‘मम्मी-पापा’ कहा, वह पल हमारे जीवन का सबसे बड़ा सुख था। अब उसकी किलकारी से घर में रौनक लौट आई है।

नायमा सिद्दीकी की माता सीमा सिद्दकी ने कहा कि नायमा हमारी बात समझ नहीं पाती थी। ऑपरेशन के बाद धीरे धीरे बदलाव दिखा और जब उसने मम्मी-पापा कहा, तो हमारी आंखें भर आईं। अब लगता है जैसे घर में नई जिंदगी आ गई है।

कॉक्लियर इम्प्लांट मूक बधिर बच्चों के लिए वरदान साबित हो रहा है। जो बच्चे जन्म से सुन नहीं पाते और बोल नहीं पाते, वे इस सर्जरी के बाद पहले ध्वनियां सुनने लगते हैं। इसके बाद नियमित स्पीच थेरेपी के जरिए धीरे धीरे बोलना सीखते हैं और सामान्य जीवन की ओर बढ़ते हैं। 5 वर्ष की आयु तक कॉक्लियर इम्प्लांट अधिक प्रभावी माना जाता है।

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की शल्य चिकित्सा योजना के तहत वर्ष 2025-26 में कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी से लाभान्वित बच्चों और उनके अभिभावकों ने प्रतिभाग किया। अभिभावकों ने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इतना महंगा ऑपरेशन कराना संभव नहीं था, लेकिन सरकार द्वारा प्रति बच्चे छह लाख रुपये के अनुदान ने उनके बच्चों को सुनने और बोलने की क्षमता दी। ऑपरेशन के बाद अस्पतालों द्वारा दी जा रही नियमित स्पीच थेरेपी से बच्चों में लगातार सुधार हो रहा है और वे सामान्य जीवन की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।

यह सर्जरी जनपद के इम्पैनल अस्पतालों डॉ. एस.एन. मल्होत्रा ईएनटी हॉस्पिटल, अशोक नगर और मरियमपुर हॉस्पिटल, शास्त्री नगर में कराई गई, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में उपचार हुआ। कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. रोहित मल्होत्रा ने बताया कि कॉक्लियर इम्प्लांट का सबसे बेहतर परिणाम 1 से 2 वर्ष की उम्र में देखने को मिलता है।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि आरबीएसके और आईसीडीएस के माध्यम से कम उम्र के मूक बधिर बच्चों का समय से चिन्हांकन कर उन्हें शीघ्र योजना का लाभ दिलाया जाए। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जैन ने ब्लॉक स्तर पर संचालित विशेष कैंपों में पात्र बच्चों के चयन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। कार्यक्रम में उप निदेशक दिव्यांगजन सशक्तिकरण रामधारी यादव और जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी विनय उत्तम भी उपस्थित रहे।

देवेश तिवारी की रिपोर्ट

WhatsApp Image 2023-11-24 at 3.32.09 PM
Deepak EV Motors sale banner
nsingh