कानपुर, 13 जून: उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में गंगा नदी की पवित्र धारा में इन दिनों जहर घुल गया है। जाजमऊ स्थित बालू घाट के पास बहने वाले एयरफोर्स नाला, चोर नाला और वाजिदपुर नाला से लगातार ट्रीटमेंट प्लांट का रासायनिक युक्त पानी सीधे गंगा में छोड़े जाने से जलजीवन को भारी नुकसान पहुंचा है। इस जहरीले पानी के प्रवाह से गंगा में लाखों की संख्या में मछलियाँ मर गईं, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
आनन-फानन में लोगों ने की मरी मछलियों की लूट:
जैसे ही गंगा के किनारे मछलियों के मरने की खबर फैली, आसपास के इलाकों की सैकड़ों की संख्या में भीड़ वहाँ जमा हो गई। लोग टोकरियों, बोरों और गमछों के साथ मछलियाँ इकट्ठा करने में जुट गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कोई बोरा भरकर मछलियाँ ले गया तो कोई अपने गमछे में सैकड़ों मछलियाँ भरकर ले गया। लोगों ने मछलियों को मुफ्त माल समझकर लूट लिया, लेकिन उन्हें इस बात का एहसास नहीं कि ये मछलियाँ जहरीले पानी में मरी हैं और इनके सेवन से उनकी जान तक जा सकती है।
जूना अखाड़े के संत ने उठाए गंभीर सवाल:
स्थानीय जूना अखाड़ा के दिगंबर अजय बांगर जी महाराज ने इस पूरे मामले में सनसनीखेज खुलासा किया है। उन्होंने कहा, “यह पहली बार नहीं हुआ है। यहाँ अक्सर ट्रीटमेंट प्लांट में डीजल चोरी के मामले सामने आते हैं। डीजल की कमी या उसे चुरा ले जाने की वजह से प्लांट सही से काम नहीं करते, और फिर 20 MLD CETP (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) और 36 MLD CETP से बिना ट्रीट किया केमिकल युक्त पानी सीधे गंगा में छोड़ दिया जाता है। नतीजा यह होता है कि नदी का पानी विषैला हो जाता है और आज की तरह लाखों मछलियाँ मर जाती हैं।”
जनता से अपील – जहरीली मछलियों का सेवन न करें:
महाराज जी ने आम जनता से विशेष अपील करते हुए कहा कि जो लोग मरी हुई मछलियों को इकट्ठा कर रहे हैं, वह इन मछलियों का सेवन बिल्कुल न करें। इनमें भारी मात्रा में रासायनिक तत्व और जहर घुला हुआ है, जिसे खाने से उल्टी, दस्त, लीवर खराब होने और गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि तुरंत इस क्षेत्र में मछलियों को बेचने पर रोक लगाई जाए और दोषी उद्यमियों व प्लांट संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
प्रशासन की स्थिति क्या है?
अब तक जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि मौके पर टीम भेजी गई है और पानी के सैंपल जांच के लिए लिए गए हैं। स्थानीय लोगों में रोष है और उनका आरोप है कि हर बार ऐसी घटना पर केवल हल्की फटकार लगाकर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है। अब देखना यह है कि इस बार गंगा की जान बचाने के लिए कोई सख्त कदम उठाया जाता है या फिर एक बार फिर मछलियों की मौत बेअसर हो जाती है?
मोहम्मद नईम की रिपोर्ट



















