भारतीय संस्कृति संसार की एक महान विराट संस्कृति है | जिसमें राष्ट्र की एकता और अखंडता के गंभीर स्वर हमारी संस्कृति में विद्यमान है| ‘राष्ट्र पहले है हम बाद में’ यह पवित्र भाव राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक के अंतःकरण में विद्यमान होना चाहिए| हमारी महान संस्कृति समन्वय पाठ पढ़ाती है| यह बात उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कही, उन्होंने ने यह भी कहा कि हमारे राष्ट्र पर कुदृष्टि डालने वालों को मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा| आतंकवाद अलगाववाद को हमारा देश कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता है | हमारे मन में भारत को परम वैभव तक पहुंचाने की भावना सब मे अवश्य होनी चाहिए ।संस्कारवान होने के साथ-साथ सुधी जनों का यह कार्य है कि वह यदि समाज में कोई कुरीति है या कुछ गलत हो रहा है तो उसमें सुधार करें कुरीति का समापन करें। इतिहास के बारे में अध्ययन और उससे सीख लेते हुए भविष्य का निर्माण करना जो कुछ इतिहास में अच्छा हुआ है उसका अनुसरण करना ऐसी बातों को अधिक से अधिक समाज जीवन में प्रचलित करने से संस्कारवान पीढ़ी का निर्माण होता है। उक्त वचन विधानसभा अध्यक्ष उत्तर प्रदेश सतीश महाना ने एसवीएम इंटर कॉलेज के आस्था सभागार में शिक्षाविद एवं लेखक नरेन्द्र भदौरिया की 15वीं पुस्तक के विमोचन पर रखे। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि नरेन्द्र भदौरिया की पुस्तक संस्कारवान समाज निर्माण के साथ-साथ इतिहास पर गर्व करना सिखाती हैं। उन्होंने कहा कि सभी पुस्तक संकलन योग्य हैं एवं प्रत्येक अध्ययनशील व्यक्ति को पढ़नी चाहिए और लोगों को पढ़ानी चाहिए।
पूर्व न्यायाधीश माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद सदस्य दूरसंचार विभाग समाधान अपीलीय अभिकरण आर के गौतम ने कहा कि वेदों के अध्ययन से शिक्षार्थियों को होने वाले लाभ एवं उपनिषदों का अध्ययन प्रत्येक शिक्षार्थी को लाभ प्रदान करता है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास संकलन विभाग के संजय ने बताया कि हमारी संस्कृति, सभ्यता व ज्ञान को मिटाने के लिए नालंदा और तक्षशिला जैसे शिक्षा केंद्र नष्ट किए गये,मंदिर तोड़े गए | हमारा इतिहास विकृत किया गया | इसलिए इस देश की संस्कृति इतिहास व ज्ञान की रक्षा करना प्रत्येक भारतीय का पुनीत कर्तव्य है| हमें गर्व है कि भदौरिया जी लेख प्राचीन गौरव के संरक्षक और राष्ट्रभक्ति की भावना से परिपूर्ण है| उनका गंभीर चिंतन भारत के सांस्कृतिक गौरव का उद्घोष है| साथ ही वे सत्यम शिवम सुंदरम के आराधक हैं| इतिहास पर गर्व करने का विषय समाज को बलवान बनाता है और नई पीढ़ी को उद्देश्य भी देता है।
पुस्तक विमोचन के अवसर पर हरिद्वार के दिव्य प्रेम सेवा मिशन के संस्थापक आशीष गौतम ने संक्षिप्त व्याख्यान में विद्यालय प्रांगण में हो रहे इस पुस्तक विमोचन को उल्लेखनीय बताया तथा इस प्रकार के अवसरों को अमृत पान की तुलना दी। उन्होंने कहा शब्द मनुष्य की अंतरात्मा का व्यक्त रूप है लेखक के अंतःकरण से निकले शब्द जब-जब विचार का रूप लेते हैं, तभी सत्साहित्य का निर्माण होता है| भदौरिया जी के उत्कृष्ट लेख उनके गंभीर चिंतन और श्रेष्ठ विचारों का अनुपम प्रकाशन है| जो मानव कल्याण की दृष्टि से लिखे गए हैं| उनके विचार सार्वभौमिक और सार्वकालिक हैं|
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आए साहित्य प्रेमियों के इस जमावड़े में जिले के आने को प्रबुद्ध जन पुस्तक हाथों में पाकर धन्यवाद प्रेषित करते दिखे। कार्यक्रम में मंच पर वरिष्ठ प्रचारक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वीरेंद्र सिंह , रायबरेली से आए पूज्य संत स्वामी भास्कर स्वरूप उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के संचालन के दौरान शिक्षक नेता वेणु रंजन भदौरिया ने सभी अतिथियों को उन्नाव जिले के साहित्य समागम में आने और इस पुस्तक विमोचन को भव्य बनाने के लिए धन्यवाद प्रेषित किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला जज नित्यानंद श्रीनेत ,जिला पंचायत अध्यक्षा शकुन सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रवीण मिश्रा, सुरेश पांडे ,बृजराज भदौरिया, दिलीप कुमार मिश्रा, डाक्टर के के शुक्ला,गणेश नारायण शुक्ला ,रामचंद्र गुप्ता , कुलदीप सिंह , कवि उमाशंकर यादव, डॉ रामनरेश ,दिलीप कुमार मिश्रा, गंगासागर यादव, मुख्य स्थाई अधिवक्ता उत्तर प्रदेश शैलेंद्र सिंह, अंजना भदोरिया,शैलेंद्र राजावत, महादेव सिंह, दिनेश पांडे , जितेंद्र यादव, विष्णु मोहन सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम संयोजक रामवीर सिंह एवं शिवांक रमन द्वारा साहित्य के संवर्धन के लिए निरंतर ऐसे प्रयास जारी रखने का सभी को आश्वासन दिया गया।


















