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कानपुर पुलिस ने बदमाश को 6 महीने के लिए किया जिलाबदर, दिखोगे तो छोड़ेंगे नहीं

कानपुर की जाजमऊ पुलिस ने हत्या का प्रयास, आर्म एक्ट के आरोपी को बुधवार को 6 महीने के लिए जिलाबदर कर दिया। बुधवार की दोपहर 3 बजे पुलिस ने आरोपी के घर के बाहर ढोल पिटवाया, उसके बाद गंगापुल के उस पार उन्नाव में छोड़ दिया। साथ ही चेतवानी दी है कि अगर इस दौरान कानपुर में दिखे तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जाजमऊ थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि क्षेत्र के नई बस्ती के रहने वाले जुम्मन ख़ान के बेटे अमन ख़ान को 6 महीने के लिए जिलाबदार किया गया है। उसके ख़िलाफ़ जाजमऊ में हत्या का प्रयास, आर्म एक्ट समेत 6 मुक़दमे दर्ज है। ये कार्रवाई न्यायालय के आदेश पर की गई है। साथ ही इलाके में लोगों से अनुरोध किया गया इस अवधि में अगर आरोपी इस क्षेत्र में घूमता दिखे तो इसकी सूचना पुलिस को दे। ताकि उसके ख़िलाफ़ जिलाबदर का उलंघन करने की कार्रवाई की जाएगी।

क्या होती है ज़िलाबदर की कार्रवाई
– एक प्रशासनिक उपाय है जिसमें आदतन अपराधियों या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों को एक निश्चित अवधि (आमतौर पर 6 महीने से 1 साल) के लिए जिले और उसके आस-पास के क्षेत्रों से बाहर रहने का आदेश दिया जाता है। ताकि उनकी आपराधिक गतिविधियों पर रोक लग सके। यह कार्रवाई पुलिस की रिपोर्ट पर जिला मजिस्ट्रेट/कलेक्टर द्वारा गुंडा अधिनियम या राज्य सुरक्षा अधिनियम के तहत की जाती है। इसका उल्लंघन करने पर कानूनी सज़ा का प्रावधान है।

क्यों होती है जिलाबदर की कार्रवाई
– इसका मुख्य उद्देश्य समाज में दहशत फैलाने वाले या बार-बार अपराध करने वाले लोगों को नियंत्रित करना है। यह अपराधियों को उनके प्रभाव वाले क्षेत्र से दूर रखकर उनकी गतिविधियों को बाधित करता है।

कैसे होती है कार्रवाई?
– संबंधित पुलिस थाना या अधिकारी आदतन अपराधियों की सूची और उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश के साथ जिला मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट भेजते हैं। जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) पुलिस की रिपोर्ट और मौजूदा हालात का मूल्यांकन करने के बाद आदेश जारी करते हैं।

मोहम्मद नईम की रिपोर्ट

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