मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फ़टकार के बाद कानपुर नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया में हुए घोटालों का मामला अब तूल पकड़ चुका है, ऐसे में कानपुर नगर निगम में ठेके और फर्मों से जुड़े मामलों की जांच अब तेज हो गई है। इसी क्रम में बुधवार को मामले की जांच कर रही पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) नगर निगम पहुंची और चीफ इंजीनियर कार्यालय में भुगतान तथा फर्म रजिस्ट्रेशन से संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी। टीम की कार्रवाई से नगर निगम में हड़कंप की स्थिति बनी रही।
SIT की प्रभारी एडीसीपी डॉ. अर्चना सिंह के नेतृत्व में पहुंची एसआईटी टीम ने चीफ इंजीनियर कार्यालय में मौजूद संबंधित फाइलों को खंगाला। जांच के दौरान कैला देवी फर्म से जुड़े भुगतान संबंधी दस्तावेजों में कुछ कमियां सामने आने की बात सामने आई है। टीम ने संदिग्ध और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की फोटो भी ली।
चीफ इंजीनियर और एक्सईएन से पूछताछ
जांच के दौरान एसआईटी ने नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों से भी जानकारी जुटाई। चीफ इंजीनियर एसएफए जैदी, एक्सईएन दिवाकर भास्कर, आरके सिंह समेत कई अधिकारियों से फर्मों के पंजीकरण, टेंडर प्रक्रिया और भुगतान से जुड़े बिंदुओं पर पूछताछ की गई। जांच के दौरान एसआईटी यह जानने की कोशिश कर रही है कि संबंधित फर्मों का पंजीकरण किस प्रक्रिया के तहत हुआ, किन कार्यों के लिए भुगतान किया गया और दस्तावेजों में सामने आई कमियों के पीछे क्या वजह है।
छह एफआईआर के बाद जांच तेज
नगर निगम से जुड़े ठेकेदारों और टेंडर प्रक्रिया के मामले में मंगलवार को छह एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच और तेज हो गई है। इसके साथ ही करीब 100 करोड़ रुपये के टेंडर निरस्त किए जाने की कार्रवाई भी सामने आई थी।
अब एसआईटी भुगतान और फर्मों के पंजीकरण से संबंधित दस्तावेजों को खंगाल रही है। टीम अधिकारियों से पूछताछ के साथ दस्तावेजों और रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल एसआईटी की जांच जारी है। अधिकारियों से पूछताछ और दस्तावेजों की पड़ताल पूरी होने के बाद मामले में और भी तथ्य सामने आने की संभावना है।
देवेश तिवारी की रिपोर्ट


















