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हाजी फजल महमूद का संदेश—नेताजी के विचार, सामाजिक न्याय का आधार; पीडीए के हक़ और सम्मान की लड़ाई रहेगी जारी

 

सपा महानगर कार्यालय में नेताजी की पुण्यतिथि पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, पीडीए और सामाजिक न्याय के संकल्प के साथ मुलायम सिंह यादव को नमन

 

कानपुर, शनिवार।-
समाजवादी पार्टी कानपुर महानगर के तत्वाधान में  नवीन मार्केट (परेड) स्थित महानगर कार्यालय में शनिवार दोपहर 2:00 बजे पार्टी संस्थापक, पूर्व रक्षा मंत्री एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्रद्धेय मुलायम सिंह यादव (नेताजी) की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा एवं विचार गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता सपा महानगर अध्यक्ष हाजी फजल महमूद ने की, जबकि संचालन सपा महानगर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शैलेंद्र यादव ‘मिन्टू ’ ने किया। महानगर अध्यक्ष ने नेताजी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद उपस्थित पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके आदर्शों पर चलने तथा सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

अध्यक्ष हाजी फजल महमूद ने कहा कि मुलायम सिंह यादव किसानों, युवाओं, पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों और शोषित-वंचित वर्गों की बुलंद आवाज थे। उन्होंने कहा कि नेताजी ने अपने राजनीतिक जीवन में समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को अधिकार, सम्मान और अवसर दिलाने के लिए संघर्ष किया। महज 15 वर्ष की आयु में किसानों के हक के लिए जेल जाने से लेकर जीवनभर जनहित के मुद्दों पर संघर्ष करने तक, उन्होंने अपने सिद्धांतों को प्राथमिकता दी। उनकी राजनीति का मूल आधार सामाजिक समानता, भाईचारा और वंचित समुदायों की भागीदारी था।

नेताजी के विचारों और लोकप्रिय नारों को याद करते हुए अध्यक्ष हाजी फजल महमूद ने कहा कि “रोटी, कपड़ा सस्ता हो, दवाई-पढ़ाई भी मुफ्त हो” का संदेश आम आदमी की बुनियादी जरूरतों से जुड़ा था। वहीं, “शिक्षा होगी एक समान, तभी बनेगा हिन्दोस्तान” समान शिक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि “मन से हैं मुलायम, इरादे लोहा हैं” नेताजी के व्यक्तित्व और दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है, जबकि “जिसका जलवा कायम है, उसका नाम मुलायम है” उनकी जनस्वीकृति का प्रतीक रहा। नेताजी का समाजवाद सबको साथ लेकर चलने, भेदभाव का विरोध करने और हर वर्ग को सम्मान देने की विचारधारा पर आधारित था।

पीडीए — समाज की भागीदारी पर जोर देते हुए अध्यक्ष हाजी फजल महमूद ने कहा कि नेताजी की सामाजिक न्याय की राजनीति आज भी वंचित समुदायों के अधिकारों और सम्मान की चर्चा में प्रासंगिक है। उनके विचारों से प्रेरणा लेकर समाज के कमजोर वर्गों को शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और निर्णय प्रक्रिया में उचित भागीदारी दिलाने के प्रयास जारी रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय का उद्देश्य केवल अधिकारों की बात करना नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान सुनिश्चित करना है। नेताजी की विरासत को आगे बढ़ाने का अर्थ है कि पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक, किसान, युवा और अन्य वंचित वर्गों की आवाज को मजबूती से उठाया जाए।

संगठन और कार्यकर्ताओं से नेताजी के आत्मीय संबंधों का उल्लेख करते हुए महानगर अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने समाजवादी पार्टी को एक परिवार की तरह चलाया। छोटे से छोटे कार्यकर्ता के साथ उनका सीधा जुड़ाव रहता था और वे उनके सुख-दुख में अभिभावक की तरह साथ खड़े होते थे। युवाओं को प्रेरित करते हुए उनका संदेश—“यह पार्टी तुम्हारी है, तुम लोगों को ही इसे चलाना है”—आज भी संगठन के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के सम्मान और उनके संघर्षों को महत्व देना नेताजी की राजनीति की प्रमुख विशेषता थी।

देश के रक्षा मंत्री के रूप में नेताजी के योगदान का उल्लेख करते हुए हाजी फजल महमूद ने कहा कि शहीद जवानों के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव तक पहुंचाने की व्यवस्था उनके महत्वपूर्ण निर्णयों में शामिल थी। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर नेताजी ने दृढ़ रुख अपनाया और सेना के मनोबल को महत्व दिया। देश की रक्षा करने वाले जवानों के सम्मान और उनके बलिदान की गरिमा बनाए रखना उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण पक्ष था।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में नेताजी की जनहितकारी पहलों को याद करते हुए हाजी फजल महमूद ने कन्या विद्या धन, बेरोजगारी भत्ता, किसानों की कर्जमाफी, मुफ्त सिंचाई, चुंगी कर की समाप्ति, उर्दू को दूसरी राजभाषा का दर्जा, सरकारी अस्पतालों में पर्चा शुल्क समाप्ति, छात्रसंघ चुनावों की बहाली और यश भारती सम्मान जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं और फैसलों के माध्यम से शिक्षा, किसान हित, युवाओं के रोजगार तथा सामाजिक-सांस्कृतिक भागीदारी जैसे मुद्दों को महत्व दिया गया। सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ नेताजी की दृढ़ता भी उनके राजनीतिक जीवन की महत्वपूर्ण पहचान रही।

सभा के समापन पर सपा महानगर अध्यक्ष हाजी फजल महमूद ने कहा कि नेताजी भले ही आज शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी समाजवादी विचारधारा, सामाजिक न्याय का संदेश और जनहित की राजनीति हमेशा मार्गदर्शन करती रहेगी। उन्होंने पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, सेक्टर और बूथ प्रभारियों से एकजुट होकर किसानों, युवाओं, पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों और अन्य वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पीडीए समाज की सम्मानजनक भागीदारी, समान अवसर और सामाजिक सद्भाव के लिए प्रयास करना ही नेताजी के विचारों को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

श्रध्दांजलि सभा मे प्रमुख रूप से महानगर अध्यक्ष हाजी फजल महमूद,वरिष्ठ उपाध्यक्ष शैलेंद्र यादव मिन्टू,महासचिव संजय सिंह बंटी सेंगर,पूर्व विधायक शिवकुमार बेरिया, सतीश निगम,विधायक अमिताभ बाजपेई,विधायक मोहम्मद हसन रूमी,के के शुक्ला,कमलेश यादव ,कमलेश ओमर,अरशद दद्दा,रजत मिश्रा, शादाब आलम,दीपक खोटे,शबाब अबरार,अर्पित त्रिवेदी,अरमान खान,सुलेखा यादव,
सत्यनारायण गहरवार,पिंटू ठाकुर, हाजी एहसान खान, महेंद्र सिंह बड़े ठाकुर, सुधांशु मिश्रा, विनय गुप्ता, इम्तियाज रसूल कुरैशी, नीलम रोमिला,रीता जीतेन्द्र बहादुर,शाहीन फातिमा,पप्पू मिर्जा,अरविंद यादव,पूजा यादव, दीपिका मिश्रा, कीर्ति अग्निहोत्री, उर्मिला,फलक नाज,मो सारिया,अमरजीत सलूजा, शरद पाण्डेय,साहिल मुशीर, मेराज खान, शिव कुमार वाल्मीकि, मुमताज मंसूरी, आकाश यादव, वीरेंद्र निषाद, एहसास बाबी, काले खां, अजय श्रीवास्तव, आलोक यादव, शौक़त अली, राहुल यादव, अमित चौरसिया, राजन पटेल, आदर्श यादव, तुषार श्रीवास्तव, विजय यादव, प्रवीण मिश्रा, शमशुल हक़, बृजलाल यादव, सोनू सुनार, हेमंत गुप्ता,राम नरेश, मनोज चौरसिया, राज कुमार पाल, सुधीर त्रिवेदी, ओम प्रकाश गुप्ता, जस्वेन्द्र निषाद, शिवम पटेल सहित सैकड़ो लोग उपस्थित रहे।।

देवेश तिवारी की रिपोर्ट

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