जिला स्तरीय नव प्रवर्तन प्रदर्शनी में बच्चों के नवाचारों की सराहना, एक ब्लॉक में लागू होगा एकीकृत कृषि प्रणाली का मॉडल
कानपुर नगर, 9 अक्टूबर। चुन्नीगंज स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में शुक्रवार को जिला स्तरीय नव प्रवर्तन प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में जिला विज्ञान क्लब की ओर से आयोजित इस प्रदर्शनी का शुभारंभ जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर और मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन ने किया।
प्रदर्शनी में बच्चों और नव प्रवर्तकों ने अपने बनाए विभिन्न मॉडल, हस्तशिल्प और उपयोगी उत्पाद प्रस्तुत किए। जिलाधिकारी ने सभी स्टॉलों का निरीक्षण किया और बच्चों की रचनात्मकता, वैज्ञानिक सोच और नए प्रयोग करने की क्षमता की सराहना की।
डीएम ने कहा कि बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं है। जरूरत है कि उन्हें सही मार्गदर्शन, संसाधन और आगे बढ़ने के अवसर दिए जाएं। उन्होंने कहा कि कई बच्चे अपने बनाए उत्पाद बेचकर पॉकेट मनी भी कमा रहे हैं। यह उनकी मेहनत, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक अच्छी पहल है।
बच्चों और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के लिए विकसित होगा बाजार
जिलाधिकारी ने कहा कि हर बच्चे और स्वयं सहायता समूह के लिए अलग-अलग ब्रांडिंग और मार्केटिंग करना आसान नहीं है। इसे देखते हुए उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि बच्चों और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की सामूहिक मार्केटिंग के लिए एक बेहतर व्यवस्था तैयार की जाए।
इसके तहत जिले में ऐसा बाजार विकसित करने की कार्ययोजना बनाई जाएगी, जहां बच्चों और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को उचित मंच मिल सके और उनकी बिक्री बढ़ाई जा सके। इससे स्थानीय उत्पादों को पहचान मिलने के साथ बच्चों और समूहों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
एक ब्लॉक में लागू होगा एकीकृत कृषि प्रणाली का मॉडल
प्रदर्शनी में कानपुर विद्या मंदिर के बच्चों द्वारा तैयार एकीकृत कृषि प्रणाली के मॉडल ने जिलाधिकारी का ध्यान आकर्षित किया। इस मॉडल में फसल उत्पादन, तालाब में मछली पालन, कुक्कुट पालन, बागवानी और वर्षा जल संचयन को एक साथ जोड़कर दिखाया गया।
इसका उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना, खेती की लागत कम करना और किसानों की आमदनी बढ़ाना है। डीएम ने मुख्य विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि इस मॉडल को जिले के किसी एक ब्लॉक में लागू करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाए।
उन्होंने कहा कि इस तरह की कृषि प्रणाली से किसानों को खेती के साथ दूसरे कामों से भी आमदनी मिल सकती है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिलेगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों के बनाए मॉडल केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए खेती और समाज से जुड़ी कई समस्याओं का समाधान भी निकाला जा सकता है। जरूरत है कि ऐसे नवाचारों को सही मार्गदर्शन और संसाधन देकर आगे बढ़ाया जाए।
प्रदर्शनी में इन प्रतिभागियों के उत्पाद रहे आकर्षण का केंद्र
प्रदर्शनी में विभिन्न बच्चों और प्रतिभागियों ने अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए। इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे—
- कविता गुप्ता — त्योहारों की सजावट से जुड़ी सामग्री।
- फलक़ — हस्तशिल्प, दुपट्टे एवं कॉस्मेटिक सामग्री।
- गौरी तिवारी — हस्तनिर्मित वस्तुएं।
- आवनी — फूलों के गमले।
- नूर फातमा — महिला ग्रामोद्योग से संबंधित उत्पाद।
- रिया एवं प्रो. किरण मिश्रा — खाद्य पदार्थ एवं हस्तशिल्प।
- तस्मिया अंसारी — कपड़े एवं वस्त्र सामग्री।
- इकरा फातिमा — कपड़े एवं वस्त्र सामग्री।


















