चकेरी – कार्तिक पूर्णिमा के दिन वैदिक सनातन धर्मोत्थान सेवा समिति के द्वारा जाजमऊ स्थित सिद्धनाथ घाट मे बड़े ही धूमधाम के साथ दीपमहोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर सिद्धनाथ घाट पर हजारों मिट्टी के दीप गंगा मे जगमगाते दिखाई दिए। पावन पर्व के अवसर पर सिद्धनाथ घाट के गंगा किनारे रेत मे क्षेत्रीय बालक – बालिकाओं द्वारा सुंदर – सुन्दर रंगोलिया बनाकर दीपको व फूलों से सजाया। काशी से आये दो अचार्य द्वारा रात 7 बजे गंगा की आरती शुरू की गई। करीब 40 मिनट आरती का कार्यक्रम चला। आरती करते समय सैकड़ो भक्त भक्ति मे लिप्त होकर आरती करते रहे। सैकड़ो भक्तो ने गंगा मे दीपदान किए जिससे गंगा का आँचल जगमगा गया। वही कार्यक्रम मे अथक मेहनत करने वाले छोटे बच्चों को समिति ने सम्मानित किया। सम्मानित होने के बाद छोटे के चेहरे खिल गए।
सनातन धर्म के अनुसार, वर्षभर पड़ने वाली सभी पूर्णमासियों में से कार्तिक माह में पड़ने वाली पूर्णिमा सबसे अधिक पवित्र मानी गई है। इस कार्तिक पूर्णिमा का तीनों देव- ब्रह्मा, विष्णु और शिव जी से जुड़ा होने के कारण, इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
ये माना गया है कि इसी दिन भगवान शिव जी ने त्रिपुर नामक राक्षस का वध किया था, जिसके बाद समस्त देवताओं ने स्वर्ग में दीये जलाकर दिवाली मनाई थी। वर्तमान में कानपुर के जाजमऊ स्थित द्वितीय काशी सिद्धनाथ घाट मे देव दिवाली मनाने की ये परंपरा चल रही है और इसी उपलक्ष्य पर सिद्धनाथ घाट पर हजारों दीप जलाकर भक्त इस पावन दिन को मनाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव के स्वागत के लिए सभी देवी-देवता एक साथ पृथ्वी पर अवतरित होते हैं।
इस अवसर पर संरक्षक अरुण द्विवेदी, विनोद दीक्षित, अध्यक्ष शिवाकांत दीक्षित, संकल्प गुप्ता, माना यादव, दीपक यादव, हर्षित मिश्रा समेत समिति के दर्जनों लोग मौजूद रहे।
मोहम्मद नईम की रिपोर्ट



















