लोकसभा में फिर उठा एक-देश एक कानून Uniform Civil Code का मुद्दा
सांसद पचौरी ने समान नागरिक संहिता को बताया वर्तमान विकसित भारत की आवश्यकता
संविधान की अनुच्छेद-44 में सभी नागरिकों को समान कानून का अधिकार:- सांसद पचौरी
नई दिल्ली:- आज दिनांक 07 दिसम्बर 2023 को लोकसभा के शीतकालीन सत्र में नियम 377 के दौरान कानपुर सांसद सत्यदेव पचौरी ने भारत में समान नागरिक संहित कानून को लागू किए जाने की बात सदन पटल पर रखी। उन्होनें कहा कि संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुसार भारत के समस्त राज्यों में नागरिकों के लिए ‘‘एक समान नागरिक कानून’’ सभी धर्म, समुदाय के लिए विवाह, तलाक, विरासत व गोद लेने आदि के कानून को एकरूपता प्रदान करेगा, जिससे अलग-अलग धर्माें के अलग-अलग कानूनों के कारण न्यायपालिका पर पड़ने वाला बोझ भी कम होगा।
सांसद पचौरी ने अपने वक्तव्य में उल्लिखित किया कि एक समान कानून के पक्षधर सिर्फ संविधान के निर्माता बाबा साहब ही नहीं बल्कि संविधान सभा के सदस्य के एम मंुशी भी थे तथा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 अटल बिहारी बाजपेयी जी के साथ-साथ देश की सर्वाेच्च न्यायालय ने भी उक्त कानून की आवश्यकता पर बल दिया है।
श्री पचौरी ने सदन को बताया कि इसमें धर्म निरपेक्षता का हित सन्निहित है। आज देश को एकता-अखंडता को मजबूती प्रदान करने के लिए इस कानून को लागू किया जाना नागरिकों के हित के साथ-साथ समय की भी आवश्यकता है। उन्होनें कहा कि समान नागरिक संहिता का लागू होना राष्ट्रीय एकता की रीड़ को संबलता के साथ राष्ट्रवादी भावना को भी बल प्रदान करेगा।
आपको बता दें कि पिछले वर्ष भी सांसद पचौरी ने शीतकालीन सत्र के शून्यकाल के दौरान इस विषय को गम्भीरता से उठाया और केन्द्र की मोदी सरकार भी इसे लागू करने के पक्ष में दिख रही है।


















