- सहस्त्रअर्चन के साथ ही पीले पुष्पो से हुआ माँ भव्य श्रंगार व महाआरती|
– स्वर व विधा की देवी के दर्शन कर कलमकारों व विद्यार्थियों ने किया, कलम का पूजन..
-सुबह से लेकर देर रात्रि तक चलता रहा ,कढ़ी, चावल का विशाल भण्डारा ,10 हजार से अधिक भक्तो ने चखा मां का प्रासाद
बसन्त पंचमी के पावन अवसर पर किदवई नगर स्थित ढाई हजार वर्ष प्राचीन जगत जननी मां जंगली देवी का 40 वां वार्षिक उत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया।
यह जानकारी मन्दिर के प्रधान पुजारी व मां जंगली देवी मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक ज्योतिष गुरु पं विजय पाण्डेय जी ने दी । उन्होंने बताया कि मैया के दरबार की मान्यता सम्पूर्ण देश मे विख्यात है, यह माँ सीता जी की तपो भूमि मानी गयी है। इस स्थान पर भी लव कुश के मुंडन संस्कार हुए और तब से इस मंदिर की मान्यता बढ़ती चली गयी । वर्ष के दोनों नवरात्र व बसन्त पंचमी को होने वाले वार्षिक उत्सव में माँ का विशेष श्रृंगार ,महाआरती व विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है ।
इस अवसर पर मन्दिर समिति के कोषाध्यक्ष मनोज कपूर ने बताया कि इस बार कोविड के चलते उत्सव में परमिशन न मिल पाने के कारण शोभायात्रा नही निकाली जा सकी । पर सुबह से ही प्रतिवर्ष के भांति ही अन्य सभी धार्मिक आयोजन यथावत हुए । जिसमे माता को सुबह मक्खन मिश्री के भोग ,दोपहर कढ़ी, चावल ,शाम को हलुवा ,खीर का भोग लगा कर मां का
सहस्त्रार्चन व भव्य श्रंगार किया गया, व रात्रि को महाआरती की गई । जिसमें नगर के सभी लोक जनसेवक गणमान्य नागरिक व हजारो की संख्या में भक्त गणो ने शामिल होकर मां के दर्शन व प्रसाद ग्रहण किया ।
इस अवसर पर मन्दिर समिति की अध्यक्ष माया वर्मा ,महासचिव राजा पाण्डेय, कोषाध्यक्ष मनोज कपूर ,सहित सभी पदाधिकारी व सहयोगी गण मौजूद रहे ।




















