कानपुर,वैशाख शुक्ल पंचमी को महाकवि सूरदास जयंती मनायी जाती है। महाकवि सूरदास सक्षम के प्रेरणा स्रोत व ब्रांड एम्बेसडर हैं। गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी कोरोना महामारी के कारण यह सूरदास जयंती सामूहिक रूप से न मनाकर सभी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने अपने- अपने घर पर रहकर बड़ी धूम धाम से मनायी। कानपुर प्रांत के सभी कार्यकर्ता बंधुओं ने अपने अपने घरों में अपने परिवार के साथ बैठकर महाकवि सूरदास जी के जीवन पर कुछ चर्चा की, इस अवसर पर प्रान्त सचिव प्रशान्त मिश्रा ने कहा कि महाकवि सूरदास ने दृष्टिबाधित होते हुए भी भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का इतना सुंदर वर्णन अपनी रचनाओं में किया है कि एक सामान्य दृष्टि वाला व्यक्ति भी इस प्रकार की रचना शायद ना कर सके। वर्तमान समय में जगत् गुरु रामभद्राचार्य जी भी नेत्र न होते हुये भी चारो वेदो, छ: शास्त्र व अठ्ठारह पुराण तथा रामचरितमानस के मर्मज्ञ है , सह सचिव सचिन पाण्डेय ने कहा कि इतिहास गवाह है कि ऐसे लोगों ने अपनी आन्तरिक इच्छा शक्ति से समाज को आइना दिखाया है, कनिका हास्पिटल में डा शरद बाजपेयी ने सूरदास जी के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए कहा कि द्रष्टि हीनता वास्तविकता में एक चुनौती है, जिस व्यक्ति ने इस सुन्दर संसार को न देखा हो उसने संसार की साकार परिभाषित किया हो,यह और कोई नहीं कर सकता है यह सिर्फ और सिर्फ कृष्ण के अनन्य भक्त सूरदास जी ही कर सकते हैं, डा शालिनी मोहन ने अपने घर पर सूरदास की पूजा करते हुये कहा कि सूरदास नेत्रहीन होते हुये भी भगवान श्री कृष्ण की छवि व उनके सौन्दर्य माधुर्य का जो वर्णन किया है वह शायद चक्षु वाला व्यक्ति नहीं कर सकता हैं,इस कोरोना काल में डा ओम पाल सिह, भारतेंदु पुरी, मुकेश श्रीवास्तव, डा शिवा मिश्रा, बृजेश सिह कटियार,डा देवेन्द्र लाल चन्दानी, श्री आशुतोष बाजपेई, योगेश कुमार, मनमोहन मिश्रा, ईमरान हैदर, अभिषेक मिश्रा, तरुण तोलानी, प्रवीन पासान,संजय चौधरी, शुभम कुशवाहा ने कोविड काल में अपने- अपने घरों में सूरदास जयन्ती मनाई


















