कानपुर नगर। मधुबन एजुकेशनल बुक्स द्वारा कानपुर में आयोजित एक दिवसीय हिंदी कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया, जिसमें 60 से अधिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों, निदेशकों, समन्वयकों एवं हिंदी शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। यह कार्यशाला हिंदी शिक्षण को अधिक प्रभावी, सरल और व्यवहारिक बनाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. प्रदीप कुमार जैन ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम को विशेष बनाया। 35 वर्षों से अधिक के अपने समृद्ध शैक्षिक अनुभव के आधार पर उन्होंने हिंदी शिक्षण की नवीन दृष्टि, कक्षा-केंद्रित गतिविधियों और व्यवहारिक शिक्षण विधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके प्रेरणादायी विचारों और सरल प्रस्तुति ने उपस्थित सभी शिक्षकों एवं शैक्षिक नेतृत्व को गहराई से प्रभावित किया। अपने संबोधन में डॉ. जैन ने कहा कि “जब शिक्षक अपने विषय को अनुभव और संवेदना से जोड़ता है, तभी शिक्षा वास्तविक परिवर्तन का माध्यम बनती है।”
उनके विचारों ने शिक्षकों के साथ-साथ विद्यालय नेतृत्व को भी आत्मचिंतन और नवाचार के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का मंच संचालन अभिषेक शर्मा द्वारा किया गया। इस अवसर पर मधुबन एजुकेशनल बुक्स के उप महाप्रबंधक अभिषेक घटक ने मुख्य वक्ता को पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।
कार्यशाला की संपूर्ण स्थानीय व्यवस्था, समन्वय एवं आयोजन प्रबंधन की जिम्मेदारी मधुबन के सौरभ श्रीवास्तव ने संभाली।
कार्यशाला के दौरान शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और समन्वयकों की सक्रिय भागीदारी, प्रश्नोत्तर सत्र एवं संवाद ने कार्यक्रम को अत्यंत जीवंत बना दिया। प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला को ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी तथा विद्यालय स्तर पर सीधे लागू करने योग्य बताया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर मधुबन परिवार की ओर से मुख्य वक्ता, सभी सहभागी विद्यालयों, प्रधानाचार्यों, निदेशकों, समन्वयकों एवं शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
देवेश तिवारी की रिपोर्ट


















