श्री बांके बिहारी जी परिवार समिति कानपुर के तत्वावधान में मोतीझील लान-2 कानपुर में 8 फरवरी से श्रीमद्भागवत कथा का विशाल आयोजन चल रहा है।
कथा व्यास भागवत रत्न आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज ने तृतीय दिवस की कथा में प्रेम की व्याख्या में बताया कि प्रेम, गुणरहित, कामना रहित प्रति क्षण बढ़ने वाला होता है। परंतु प्राणियों और पदार्थों से प्रेम होने पर यह काम और लोभ को जन्म देकर उत्पीड़क हो जाता है, वहीं परमात्मा से प्रेम होने पर शुद्ध और पवित्र हो जाता है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी श्री रामचरितमानस में परमात्मा से उनके प्रेम के बारे में लिखा है कि
कामिहि नारि पिआरि जिमि लोभिहि प्रिय जिमि दाम । तिमि रघुनाथ निरंतर प्रिय लागहु मोहि राम ।।
कथा व्यास श्री गोस्वामी जी ने कानपुर नगर के बारे में अत्यंत भावार्थ व्यक्त करते हुए कहा कि- कर्णात् प्रविष्य जनानाम् पुनाति इति कानपुरः
जहां भागवत कथा कानों के द्वारा प्रवेश कर हृदय को पवित्र करती है, वह स्थान कानपुर है।
कथा व्यास जी के श्रीमुख से कथा रस और मधुर भजनों कृष्णा रटे से तृष्णा मिटे ये, एक अर्ज मेरी सुन लो दिलदार ऐ कन्हैया, श्री राधे गोपाल भज मन श्री राधे आदि को सुनकर श्रोतागण भाव विभोर होकर झूम उठे और मंत्रमुग्ध होकर नृत्य करने लगे। पंडाल श्री राधा नाम की जय जयकारों से वृंदावनमय हो गया था।
कथा के मुख्य प्रसंग, अजामिल उपाख्यान, कपिल देवहूति संवाद, ध्रुव चरित्र आदि रहे।
संजय गुप्ता, पंकज बंका, राम किशन अग्रवाल, विनोद मुरारका, अनुपम अग्रवाल, राजेंद्र गुप्ता, राम कृष्ण गुप्ता, कृष्ण कुमार तुलस्यान, अंकुर सिंघल एवं विजय पाल आदि मौजूद रहे।
देवेश तिवारी की रिपोर्ट


















