जिला विद्यालय निरीक्षक के खिलाफ चल रहा शिक्षकों का पैदल मार्च मंगलवार को पांचवें दिन एक अहम मोड़ पर पहुंच गया। -अजगैन क्षेत्र से शुरू हुए इस मार्च में 11 से अधिक शिक्षक व कर्मचारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में आगे बढ़ना शुरू किया, लेकिन लगभग दो किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप किया।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री द्वारा मामले का संज्ञान लिए जाने के बाद स्थानीय प्रशासन को आवश्यक निर्देश प्राप्त हुए। इसी क्रम में अरविंद्र चौरसिया के नेतृत्व में प्रभारी निरीक्षक सुरेश कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और शिक्षकों से शांतिपूर्वक मार्च रोकने का अनुरोध किया।
पैदल मार्च का नेतृत्व कर रहे शिक्षक संघ के संयोजक श्री हरिश्चंद्र दीक्षित ने स्थिति को देखते हुए प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान पर बैठाकर विचार-विमर्श किया। इस दौरान श्री चौरसिया ने शिक्षकों को जानकारी दी कि प्रातः 11 बजे मुख्यमंत्री स्तर से मामले के समाधान का आश्वासन मिला है तथा डीजीपी उत्तर प्रदेश को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
आश्वासन के बाद शिक्षकों ने रणनीतिक निर्णय लेते हुए प्रशासन के माध्यम से अपना पक्ष मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का विकल्प चुना। एसीपी हसनगंज ने तीन ज्ञापन स्वीकार करते हुए भरोसा दिलाया कि उन्हें शीघ्र ही मुख्यमंत्री कार्यालय तक भेजा जाएगा।
ज्ञापन स्वीकार होने और उच्च स्तर पर समाधान के संकेत मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों में संतोष का माहौल दिखाई दिया। शिक्षकों ने कहा कि यदि शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो वे अगली रणनीति तय करेंगे।
पैदल मार्च में हरीश चन्द्र. दीक्षित, शिव बहादुर, राजेंद्र कुरील पंकज कुमार वर्मा , अफजल अहमद, इकदार अहमद,उमेश चंद, जितेंद्र वाल्मीकि, सेवक राम अन्नत स्वरूप, अंकुर यादव, इन्द्र पाल, अमित कुमार, अनिल कुमार अजीत कुमार सिंह सहित कई शिक्षक व कर्मचारी मौजूद रहे। आंदोलन फिलहाल स्थगित किया गया है, लेकिन शिक्षक संगठन ने स्पष्ट किया है कि न्याय मिलने तक उनकी आवाज बुलंद रहेगी।
मुख्यमंत्री के संज्ञान के बाद रुका शिक्षकों का पैदल मार्च, प्रशासन को सौंपे गए तीन ज्ञापन-हसनगंज


















