कानपुर नगर । भगवान शिव की भक्ति को समर्पित व प्रिय मन भावन सावन माह का शुभारंभ हो चुका है। पुराणों में वर्णित व ज्योतिषीय गणनानुसार पूरे श्रवण मास पृथ्वी पर भगवान शिव का वास होता हैं जिसमे उनके शिवलिंग पर गंगा जल ,दूध व बेलपत्र चढ़ाने से उनकी प्रसन्नता व भक्ति की प्राप्त होती है । यूँ तो दुनियां भर में सबसे ज्यादा भगवान शिव के लाखों पूज्य मन्दिर है। पर भारत वर्ष में अति विशेष पूजित द्वादश ज्योतिर्लिंगों के अलावा देशभर में कई स्वयम्भू शिवलिगों में वर्णित कई शिव मंदिर है । यूँ तो अलग अलग स्थानों में प्रत्येक मन्दिर की पृथक मान्यता है । पर उत्तर भारत की औधोगिक नगरी कहे जाने वाले कानपुर नगर के भगीरथी तट पर स्थित परमट क्षेत्र में स्थित लगभग 3 सदी प्राचीन बाबा आनदेश्वर शिवधाम के प्रति भक्तों की अपार व श्रद्धा है। जो सावन माह में आस्था के जनसैलाब के रूप में प्रतिवर्ष देखते ही बनती है ।
इस मंदिर के बारे में एक प्राचीन कथा जनश्रुति में बहु प्रचिलित है ।
की — …कालांतर में
लगभग 300 वर्ष पूर्व सीसामऊ के ज़मीदार . मिश्रा जी का यह क्षेत्र हुआ करता था । जिनकी बहुसंख्यक गायेँ इसी नितांत निर्जन स्थान पर विचरण करती थी ,जिनमे से एक श्याम वर्ण “आनंदी नामक” दुर्लभ प्रजाति की गाय थी जो अपना सारा दूध इस निर्जन स्थान पर नित्य प्रायः गिरा दिया करति थी, कर्मचारियों द्वारा निगरानी दौरान जब ज़मीदार को इसकी जानकारी होने व उन्हें आये दिव्य स्वप्न में इस स्थान पर शिव मंदिर बनवाने के आदेश के, उपरांत उंक्त स्थान की खुदाई करवाने पर कालांतर में यहाँ भूरे रंग का एक पिंडी रूप शिवलिंग प्राप्त हुआ ,जिसे उन्ही ज़मीदार की प्रेरणा से उसी स्थान पर मन्दिर बनवाकर स्थापित करवाया गया । विद्वानजनों व जनश्रुति में प्रचलित मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग का प्राकट्य श्रवण मास का प्रथम सोमवार को ही हुआ था , तभी से आनंदी गाय द्वारा पूजित इस परम् पूज्य धाम का नाम बाबा आनदेश्वर रूप में बिख्यात हुआ । और सावन के प्रथम सोमवार को यहाँ दूध चढ़ाने की प्रथा कालांतर से अब तक चली रही है ।
पतित पावनी भगीरथी के पावन तट परमट स्थित बाबा आनंदेश्वर मन्दिर धाम की मान्यता है कि जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा से सावन मास के प्रथम सोमवार को गंगाजल ,दूध व बिल्वपत्र बाबा को अर्पण करता है ,बाबा उसकी हर विपदा को हरते हुए भक्त को सर्वकामना पुर्ण कर आनंद से निहाल कर देते है।
भक्तो द्वारा यहाँ की एक और काव्य रचना प्रचलित है ……..की…..
बाबा आनंदेश्वर आनंद करें,……
करें सब संकट से दूर…..
जो सेवक शरणनन रहे,….
रहे सदा भरपूर…..
बाबा बाबा सब कहे माई कहे न कोई ….
बाबा के दरबार मे माई कहे सो होई….
मान्यता है कि बाबा के पास जाने के पूर्व मां गंगा जी के पास अपनी प्रार्थना करने के उपरांत वहाँ से गंगाजल लाकर बाबा को अर्पण करने वाले भक्त की अकाल मृत्यु को भी बाबा टाल देते है, ओर श्याम वर्ण गाय के दूध से बाबा का अभिषेक करने से भक्त की हर कामना शीघ्र पूरी कर देते है। बिल्व पत्र की पीठ पर मां गौरी का वास माना गया है इसलिए उल्टा बिल्वपत्र चढ़ाने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते है और भक्त की प्रत्येक अभिलाषा को क्षणभर में पूरी कर देते है ।
Senior Reporter-Kamal Mishra



















