कानपुर, अमीरूल मोमिनीन हज़रते सैय्यदना फारूक-ए-आज़म रजि. के बारे में पैगम्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते है कि अगर मेरे बाद कोई नबी होता तो वो उमर होते आप इस्लाम के दुसरे खलीफा भी थे, पैगम्बरे इस्लाम इरशाद फरमाते हैं कि मैं बिला शुबा निगाहे नबूवत से देख रहा हूं जिन के शैतान और इंसान के शैतान भी मेरे उमर के खौफ (डर) से भागते हैं। हज़रत आयशा से रिवायत है कि पैगम्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते है कि आसमानो के सितारों के बराबर हमारे उमर की नेकियां हैं उक्त विचार मदरसा अरबिया रज्जाकिया मदीनतुल उलूम के तत्वाधान में आयोजित यौमे उमर फारूक-ए-आज़म के जलसे को संबोधित करते हुए हज़रत अल्लामा व मौलाना मुफ्ती साकिब अदीब मिस्बाही काज़ी-ए-शहर कानपुर ने बांस मंडी मदरसा रज्जाकिया में व्यक्त किए।
हज़रत मौलाना मुफ्ती रफी अहमद मिस्बाही प्रधानाचार्य मदरसा अहसनुल मदारिस जदीद रज्बी रोड नई सड़क ने कहा इस्लाम को इतना फायदा किसी के ईमान लाने से नही पहुंचा जितना कि उमर फारूके आज़म के ईमान लाने से पहुंचा, अदल व इंसाफ के पैकर थे हज़रत उमर फारूके आज़म, हज़रत उमर फारूके आज़म रजि. रातों को मदीने के गलियों में गश्त लगाकर लोगों की खबरगीरी किया करते थे,आपने दस साल, छ: माह, चार दिन खिलाफत की और एक मोहर्रम 24 हिजरी को 63 साल की उम्र में इस दुनिया से रुखसत हो गए। इससे पूर्व जलसे की शुरूआत तिलावते कुरआन पाक से हाफिज मोहम्मद असद ने की और बारगाहे रिसालत में माजूर कानपुरी, हाफिज नेमत उल्लाह, मौलाना हसीब उररहमान, मोहम्मद सैफ ने नात शरीफ का नजराना पेश किया जलसे की सरपरस्ती हाफिज अब्दुल रहीम बहराइची व संचालन शब्बीर कानपूरी ने किया।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से मौलाना फिरोज़ अहमद, हाफिज मोहम्मद खुर्शीद, अब्दुल कलाम, मोहम्मद कैफ, हाजी अतीक, हाजी मोहम्मद नसीम अंसारी, इजहार अहमद खान, मोहम्मद ज़ुबैर खान, मोहम्मद मोइन लड्डन, हाजी मोहम्मद आसिफ रईस, नफीस अहमद एडवोकेट, मोहम्मद शरीफ़, मुहम्मद फिरोज़, शाकिर अली सुपर लाइट आदि लोग उपस्थित रहे।
बांस मंडी मदरसा रज्जाकिया में मनाया गया दूसरे खलीफा फारूक-ए-आज़म का जलसा


















