कानपुर के जाजमऊ स्तिथ द्वितीय काशी कहे जाने वाला बाबा सिद्धनाथ धाम में सावन के पावन अवसर पर एक भक्त ने बाबा के ऊपर एक सोने के छत्र के साथ साथ एक सोने का घण्टा और एक चांदी का घण्टा भी चढ़ाया है ।छात्र चढ़ाने से पहले मन्दिर के पुजारी मुन्नी लाल पांडेय ने भक्त के साथ पहले बाबा की पूजा अर्चना कर छत्र और घण्टो की पूजा की जिसके बाद मंदिर में लगाया गया।जिसे देखने दूर दूर से लोग आ रहे है।आप को बता दे कि सिद्धनाथ धाम मन्दिर सैकड़ो वर्ष पुराना है ।वही मान्यता है कि यहां पर राजा ययाति का महल हुआ करता था जिन्हें सपने में भगवान शंकर ने दर्शन दिए और बोला कि यहां सौ यज्ञ कराओ तो यह दूसरा काशी बन जायेगा जिसके बाद राजा ने यज्ञ कराए लेकिन एक कौन ने यह 99 यज्ञ के दौरान हवन कुंड में हड्डी डाल दी थी जिससे महल पलट गया था।वही यह भी बताया जाता है कि यहां वर्षो पहले जंगल हुआ करता था जहा एक गाय चराने आती और जब वापस अपने मालिक के पास शाम में जाति तो दूध नही देती जिसके बाद मालिक ने एक आदमी को गाय के पीछे लगाया तो उसने देखा कि गाय यहां आकर घास के ऊपर दूध छोड़ देती है जिसे नौकर ने अपने मालिक को बताया जिसके बाद मालिक ने जब वह सफाई कराई तो वहां शिवलिंग निकला और तब उसने यहां मन्दिर का निर्माण कराया जो आज सिद्धनाथ धाम के नाम से जाना जाता है



















