देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में हुए सिख विरोधी दंगों में कानपुर में 127 लोगों को मौत के घाट उतारा गया था। इस दौरान कई घरों को लूटा गया और एक ही परिवार के कई कई लोगों को बेदर्दी से कत्ल कर दिया गया। कुछ लोगों को धारदार हथियार से निर्ममता से काटा गया तो कुछ को जिंदा आग के हवाले कर दिया गया। सिख समुदाय इंसाफ के लिए इंतजार करता रहा और 3 दशक से अधिक का समय गुजर गया मगर इंसाफ नहीं मिला। अब सिख समुदाय के जख्मों पर मरहम लगता हुआ दिख रहा है और उनमें इंसाफ की उम्मीद जगी है। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिख दंगों की जांच के लिए 2019 में एक एसआईटी का गठन किया था। इस एसआईटी को तमाम शक्तियां दी गई और निष्पक्ष जांच करने को कहा गया। एसआईटी ने 11 मामलों में अपनी जांच पूरी कर ली है और इन मामलों में चार्जशीट लगायी जा रही है। इस दौरान एसआईटी ऐसे-ऐसे स्थानों पर पहुंची जहां इसके पहले गठित किए गए जांच दल कभी नहीं गए। जबकि फॉरेंसिक टीम के साथ गई एसआईटी को यहां पर 36 साल पहले हुई बर्बरता के निशान भी मिले । फॉरेंसिक की जांच में एक मकान में जहां खून मिला तो वही आग से जलाए जाने के सुबूत भी। किदवई नगर में स्थित तत्कालीन गुरुद्वारे में कथित दंगाइयों ने दो लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने वारदात के 36 साल बाद यहां से सुबूत जुटाए हैं।इस बार जिस तरीके से एसआईटी ने काम किया है और 11 मामलों में चार्जशीट की तैयारी है ऐसे में सिख समुदाय को अब इंसाफ मिलता दिख रहा है। यह लोग बीजेपी सरकार की सराहना कर रहे हैं और उम्मीद लगाए हैं कि जल्द ही उन्हें इंसाफ मिल जाएगा।
एसआईटी ने 36 साल पूर्व गुरुद्वारे में हुई हत्या के मामले में की पूरी जांच,सिख समुदाय में जागी न्याय की आस।


















