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कानपुर,बिधनू कठेरुआ स्थित पंचमुखी हनुमंत धाम में श्रीमद्भागवत कथा का सातवां दिन द्वाराचार्य मलूकपीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य का जन्मोत्सव।श्रीमद्भागवत कथा सुनने से मानव जीवन सार्थक और धन्य हो जाता है। साथ ही मनुष्य के संस्कारों का उदय हो जाता है।कथा सुनने का लाभ तभी है,जब हम इसे अपने जीवन में उतारकर उसी के अनुरूप व्यवहार करें।यह बात बिधनू कठेरुआ स्थित पंचमुखी हनुमंत धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन शुक्रवार को कथावाचक मलूकपीठाधीश्वर राजेन्द्र दास देवाचार्य महाराज के शिष्य चन्द्रेश महाराज उर्फ चन्द्रदास ने कही।उन्होंने कहा कि जीवन में कितनी भी विकट परिस्थिति क्यों न आ जाए मुनष्य को अपना धर्म व संस्कार नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसे ही मनुष्य जीवन के रहस्य को समझ सकते हैं। जिसका मन भगवान के चरणों में लगा रहता है, उसका जीवन धन्य हो जाता है।भगवान ने विभिन्न लीलाओं के माध्यम से जो आदर्श प्रस्तुत किए,उसे हर व्यक्ति को ग्रहण करना चाहिए।ऐसा करने से जीवन मूल्यों के बारे में जानकारी मिलने के साथ-साथ अपने कर्तव्य को भी समझा जा सकता है।कार्यक्रम के दौरान संगीतकारों ने सुंदर भजनों की प्रस्तुति से श्रोताओं को भक्ति रस में डूबों दिया।इस मौके पर श्रीबाबू शुक्ल,रानी शुक्ला,डा.वीना आर्या, रामबहादुर सिंह यादव,सुरेंद्र अवस्थी,संजीव द्विवेदी, अचार्य विजय बाजपेई,श्याम द्विवेदी,गौरव मिश्रा,शोभित बाजपेई,दीपक श्रीवास्तव, मनीष श्रीवास्तव, नीरज सिंह,सतीश शुक्ल,सिद्धार्थ तिवारी,दुर्गेश रावत मौजूद रहे।

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