कानपुर।
केंद्र सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा यूपीआई (UPI) लेनदेन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के फैसले के खिलाफ कानपुर के व्यापारियों में गहरा आक्रोश है [0.4%]. इस नीति के विरोध में समाजवादी पार्टी व्यापार सभा कानपुर महानगर के बैनर तले आज कैनाल रोड पर एक विरोध प्रदर्शन और जुलूस निकाला गया, जिसमें केंद्र सरकार के इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की गई।
दोपहर 02:30 बजे कैनाल रोड स्थित कार्यालय से यह जुलूस शुरू हुआ। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजवादी पार्टी कानपुर महानगर के महानगर अध्यक्ष हाजी फजल महमूद ने की, जबकि इसका नेतृत्व और संचालन समाजवादी व्यापार सभा के महानगर अध्यक्ष नंदलाल जायसवाल द्वारा किया गया। इस प्रदर्शन में कैनाल रोड, बर्तन बाजार, एक्सप्रेस रोड, सर्राफा बाजार और जनरल गंज जैसे प्रमुख बाजारों के कपड़ा, सर्राफा और किराना व्यापारी शामिल हुए। व्यापारी हाथों में तख्तियां लेकर केंद्र की भाजपा सरकार के इस फैसले के खिलाफ विरोध दर्ज कराते हुए आगे बढ़े।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष हाजी फजल महमूद ने केंद्र की भाजपा सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले ‘कैशलेस इकोनॉमी’ और ‘डिजिटल इंडिया’ का भरोसा देकर सभी छोटे और मध्यम श्रेणी के व्यापारियों को नकद लेनदेन छोड़कर यूपीआई अपनाने के लिए प्रेरित किया। अब जब बाजार पूरी तरह से डिजिटल भुगतान पर निर्भर हो चुका है, तो ऐन त्योहारी सीजन के वक्त 15 अक्टूबर 2026 से यह नया मर्चेंट टैक्स (MDR) लागू किया जा रहा है [0.4%]. उन्होंने इसे भाजपा सरकार द्वारा व्यापारियों के साथ किया गया एक बड़ा धोखा बताया।
अपने संबोधन में हाजी फजल महमूद ने आगे कहा कि भाजपा सरकार के इस अव्यावहारिक टैक्स के कारण व्यापारी और आम जनता दोबारा नकद (Cash) लेनदेन की तरफ लौटने को मजबूर होंगे। इससे बाजार में पारदर्शिता प्रभावित होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार का यह कदम साबित करता है कि उसे जमीनी स्तर पर काम करने वाले छोटे व्यापारियों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। यह नीति केवल बैंकों और चुनिंदा निजी फिनटेक कंपनियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से लाई गई है, जिससे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा
इसके बाद समाजवादी व्यापार सभा के महानगर अध्यक्ष नंदलाल जायसवाल ने व्यापारियों को संबोधित करते हुए इस नए नियम के तकनीकी और आर्थिक नुकसानों को सामने रखा। उन्होंने कहा कि नवीन मार्केट के रेडीमेड कपड़ा व्यापारी हों या जनरल गंज के थोक कारोबारी, बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण अधिकांश व्यापारियों का शुद्ध मुनाफा पहले से ही मात्र 1% से 3% के बीच सिमटा हुआ है। ऐसी स्थिति में ₹2,000 से ऊपर के हर ट्रांजैक्शन पर 0.4% की कटौती व्यापारियों के मुनाफे को सीधे तौर पर खत्म कर देगी [0.4%].
व्यापार सभा अध्यक्ष नंदलाल जायसवाल ने आगे कहा कि नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक व्यापारी इस शुल्क को ग्राहकों से भी नहीं वसूल सकते, यानी यह पूरा वित्तीय बोझ व्यापारी को अपनी जेब से ही उठाना होगा। इसके अलावा रेलवे, फ्यूल और टेलीकॉम जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग नियम बनाकर सरकार ने छोटे व्यापारियों के दैनिक बहीखाते और जीएसटी रिटर्न की प्रक्रिया को बेहद जटिल बना दिया है। व्यापारियों ने इस शोषकारी व्यवस्था को स्वीकार करने से साफ इनकार किया है। उन्होंने सरकार को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस मर्चेंट चार्ज के फैसले को पूरी तरह वापस नहीं लिया गया, तो समाजवादी व्यापार सभा आने वाले दिनों में पूरे उत्तर प्रदेश के बाजारों को ठप कर अपने आंदोलन को और तेज करेगी।
प्रदर्शन मे प्रमुख रूप से महानगर अध्यक्ष हाजी फजल महमूद,व्यापार सभा अध्यक्ष नन्दलाल जयसवाल,वरिष्ठ उपाध्यक्ष शैलेन्द्र यादव मिन्टू,महासचिव संजय सिंह बंटी सेंगर,दीपा यादव,कीर्ती अग्निहोत्री,निशांत गुप्ता,संदीप शर्मा,ऋषि राज,साकिफ क़ुरैशी,सचिन सिंह,संजय गौड,शैलेश जिद्दी,पारस सोनी,संजीव अग्रवाल,संत कुमार,महेन्द्र सिह,ओमप्रकाश गुप्ता,सगीर अहमद,बृजलाल यादव,सुधाशु मिश्रा,गुड्डू यादव आदि लोग प्रमुख रहे।
देवेश तिवारी की रिपोर्ट


















