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जैनधर्म के सर्वोच्च तीर्थक्षेत्र सम्मेदशिखर जी की पवित्रता बनाए रखने हेतु प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौपा

ललितपुर।मड़ावरा-जैनधर्म के सर्वोच्च तीर्थक्षेत्र सम्मेदशिखर जी की पवित्रता बनाए रखने हेतु प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन बुधवार को मड़ावरा की दिगम्बर जैन समाज ने एसडीएम संजय कुमार पांडेय को सौपकर क्षेत्र की पवित्रता बनाए रखने की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया है कि झारखंड राज्य के गिरिडीह जिले के मधुबन में स्थित श्री सम्मेद शिखर जी पहाड़ी पौरोणिक काल से ही जैन धर्म के अनुयायिओं का सबसे बड़ा तीर्थ क्षेत्र रहा है। जैन धर्म के कुल 24 तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों की निर्वाण स्थली होने के कारण संपूर्ण जैन समाज के लिये श्री सम्मेद शिखर जी पहाड़ का कण-कण एक मंदिर परिसर के समान पूज्यनीय एवं वंदनीय है।
साल के बारहों महीनें विश्व भर से लाखों जैन तीर्थयात्री बेहद श्रद्धाभाव के साथ व्रत धारण कर नंगे पैर और शुद्ध सूती वस्त्रों में शरीर को गला देने वाली ठंड या फिर झुलसा देने वाली गर्मी में झारखंड की सबसे उंची पहाड़ी की 27 किलोमीटर की इस बेहद कठिन चढ़ाई वाले पहाड़ पर वंदना करने जाते हैं। सभी जैन तीर्थयात्री पारसनाथ पहाड़ की पवित्रता अक्षुण्ण बनाए रखने को अपना सर्वोच्च कर्तव्य समझते है । स्थानीय आदिवासियों व नागरिकों ने भी इस पहाड़ की पवित्रता को बनाये रखना सदैव अपना कर्तव्य समझा है।
पिछले कुछ महीनों से श्रद्धा के इस अक्षुण्ण तीर्थ स्थल की पवित्रता और सुचिता को सैर सपाटे व पिकनिक के नाम पर नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। पिकनिक, ट्रेकिंग या फिर मात्र मनोरंजन के लिये आने वाले यात्री इस पवित्र पहाड़ पर मांसाहार व शराब का सेवन करते पाए गए हैं जो अहिंसा व शान्ति प्रेमी जैन समुदाय के लिये बेहद पीड़ाजनक है ।
माननीय प्रधानमंत्री जी से अनुरोध किया गया है कि जैन धर्म के इस शाश्वत तीर्थ क्षेत्र की एक निश्चित परिधि मधुबन सहित सम्पूर्ण पारसनाथ पहाड़ी पर मांसाहार व शराब का विक्रय के साथ-साथ सेवन के भी कड़े प्रतिबंध व दण्ड को लेकर राजाज्ञा जारी की जानी चाहिये।
एक अल्पसंख्यक समाज की मान्यताओं, धार्मिक विश्वासों, आस्था को संरक्षण प्रदान करना केन्द्र सरकार के कर्तव्य के साथ-साथ जिम्मेदारी भी है। श्रीसम्मेदशिखर जी पहाड़ की पवित्रता को बनाये रखने के लिये जैन समाज का यह खुला पत्र उचित संरक्षण प्रदान करने हेतु झारखंड सरकार को अग्रसरित करने हेतु केन्द्र सरकार से अनुरोध है।
धार्मिक अल्पसंख्यक जैन समाज का एक अनुयायी होने के नातें केन्द्र सरकार से यह अनुरोध है कि धर्मनिरपेक्ष देश भारत के संविधान की धारा 29 के अन्तर्गत जैन समाज के सर्वोच्च तीर्थ स्थल की पवित्रता व सुचिता को बनाये रखने हेतु केन्द्र सरकार अपना संरक्षण प्रदान करते हुये उचित कदम उठायेगी।
ज्ञापन देने वालों में डॉ. शिखरचंद्र सिलोनिया, प्रकाश जैन मेडिकल, डी. के. सराफ, राजेश राजू सौरया, रज्जू खुटगुवां, कमलेश जैन, सुधीर जैन, शीतल जैन, अभिनंदन सौरया, सुनील जैन, मयंक बड़ागांव, प्रियंक सराफ, आशीष गौना, बिट्टू खुटगुवां, सनी सौरया, मधुर खुटगुवां, अविनाश जैन, प्रदीप जैन, अभिषेक जैन, सुरेन्द्र दुकान वाले, राजीव जैन, सतेंद्र, नयन जैन आदि शामिल रहे।
उत्तर प्रदेश उत्तराखंड दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के मंत्री डॉ. सुनील संचय ने बताया कि सम्मेदशिखर जी जैन परंपरा का सर्वोच्च तीर्थक्षेत्र है, पिछले दिनों वहां के अनेक वीडियो सोशल मीडिया पर आए हैं जिसमें असामाजिक तत्त्व क्षेत्र की पवित्रता से खिलवाड़ करते नजर आ रहे हैं। सम्पूर्ण देश में जैन समाज में सोशल मीडिया पर यह मुद्दा छाया हुआ है। बड़ी संख्या में लोग इस्टाग्राम, फेसबुक, ट्वीट, व्हाट्सएप माध्यम से इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री और झारखंड के मुख्यमंत्री आदि को ईमेल, ट्वीट, ज्ञापन आदि के माध्यम से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

मु0 जाकिर मंसूरी ललितपुर

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