कानपुर। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा होटल व्यवसाईयों पर भारी भूगर्भ जल क्षतिपूर्ति अधिरोपित की गई है। बगैर किसी पूर्व सूचना के इतनी भारी क्षतिपूर्ति जमा करने का आदेश होटल व्यवसाईयों को हैरान एवं परेशान कर रहा है। करोना काल के जख्मों से ग्रसित होटल व्यवसाय पर अस्तित्व का संकट खड़ा है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा पारित आदेश, जो कि उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा प्रदत्त काल्पनिक आकड़ों पर आधारित है। जिसमें प्रत्येक होटल का प्रत्येक कमरा का जल खपत प्रतिदिन 350 KLD बताया गया है, वह वास्तविकता से परे है।
केन्द्रिय भूगर्भ जल विभाग की अधिसूचना 24-01-2020 के अनुसार 10 हजार लीटर प्रति दिन, प्रत्येक लघु एवं सुक्ष्म उद्योगों को छूट दी गई है, उसमें अधिकांश होटल पंजीकृत है, परंतु प्रदेश सरकार न्यायालय की आड़ में, होटल मालिकों को छूट से वंचित कर रही है।
3 होटल में 50 कमरे तक 10 लाख, 50 से 100 कमरे तक लाख एवं 100 कमरे तक 50 लाख क्षतिपूर्ति अधिरोपित है जो कि न्याय संगत नहीं है। कानपुर महानगर में १०% प्रतिशित होटलों में 6कमरे से 50 कमरे तक है। उनकी इतनी आमदनी भी नहीं कि भारी क्षतिपूर्ति वहन कर
जिन होटलों ने प्रदुषण एवं भूगर्भ जल की सहमति ली है उन पर भी ‘पेनाल्टी अधिरोपित है।
हम सरकार से गुहार लगाते है कि विधि विरुद्ध अधिरोपित इस क्षतिपूर्ति को तत्काल ध्य कर, हमारे हितो की रक्षा करें।
‘होटल व्यवसाय पर उत्पीड़न के बादल’


















