समाज कल्याण सेवा समिति द्वारा 15 मार्च, 2009 से कानपुर नगर तथा 10 जनवरी 2010 से कानपुर देहात में लावारिश शवों का ससम्मान अपने परिजनों की भांति अन्तिम संस्कार कराया जा रहा है। सत्यता यह है कि दुनियाँ में हर जन्म लेने वालों के माता-पिता-बहन-भाई तथा नाते-रिश्तेदार होते हैं किन्तु दुर्घटना आदि से अज्ञात स्थल पर मृत्यु होने तथा अपनी पहचान मिटने के कारण वह लावारिश हो जाता है तथा उसके साथ जानवरों से बदतर व्यवहार किया जाता था। उन्हें जल्लादों द्वारा नदियों में फिंकवाया जाता था।
लावारिश शवों का अपने परिजनों की भांति अन्तिम संस्कार


















