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कानपुर पुलिस का बड़ा एक्शन: 125 करोड़ के साइबर फ्रॉड का खुलासा, बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से हुई ठगी, 8 गिरफ्तार

 

कानपुर, 30 अप्रैल 2026। कानपुर पुलिस ने साइबर अपराध के इतिहास में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए संगठित साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस गिरोह के 8 सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिन पर देशभर में अब तक करीब 125 करोड़ रुपये की ठगी का आरोप है। यह गिरोह फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर और बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर ठगी को अंजाम देता था।

गैंग का खुलासा कैसे हुआ?

पुलिस आयुक्तालय के अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना बर्रा पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि एच ब्लॉक पेट्रोल पंप के पास प्राइमरी स्कूल के आसपास कुछ लोग एक बड़े साइबर अपराध की योजना बना रहे हैं। इस सूचना पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन संदिग्धों को मौके से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी के बाद पुलिस ने पांच अन्य आरोपियों को भी दबोच लिया।

कैसे करते थे ठगी?

इस गैंग का मास्टर प्लान बेहद शातियाना था:

1. बैंक कर्मियों की सांठगांठ: आरोपी देश के कई बैंकों (यूपी ग्रामीण बैंक, जम्मू-कश्मीर बैंक, सीएसबी बैंक, यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक, एक्सिस बैंक, यूको बैंक, सिटी यूनियन बैंक सहित) में तैनात कर्मचारियों को कमीशन देकर उनकी मिलीभगत लेते थे।
2. फर्जी अकाउंट: बैंक कर्मचारी मिलकर फर्जी दस्तावेजों और फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन के आधार पर करंट और ट्रस्ट अकाउंट खोल देते थे। इन अकाउंटों में लेन-देन की कोई लिमिट नहीं होती थी।
3. पैसा ट्रांसफर और कमीशन: ‘डिजिटल अरेस्ट’ और ‘इन्वेस्टमेंट फ्रॉड’ से ठगी गई रकम को इन फर्जी अकाउंट्स में मंगवाया जाता था। इस रकम पर बैंक कर्मचारियों को 5 से 10 फीसदी का कमीशन दिया जाता था।
4. जांच से बचाव: जैसे ही किसी अकाउंट के खिलाफ साइबर कंप्लेंट आती, बैंक के भ्रष्ट कर्मचारी तुरंत पूरी रकम निकालकर बदमाशों को दे देते और अकाउंट बंद करा देते थे। इससे पुलिस के लिए पैसे का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।

कितनी बड़ी है ये ठगी?

प्रारंभिक जांच में पुलिस को कई बड़े ट्रांजेक्शन के सबूत मिले हैं:

· एक अकाउंट से करीब 53 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ।
· दूसरे अकाउंट से 66 करोड़ रुपये का।
· एक अन्य अकाउंट से 5 करोड़ रुपये का।
· इसके अलावा, नवी मुंबई साइबर थाने में दर्ज एक मामले में इस गैंग ने 58 करोड़ रुपये का डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड किया।

गिरफ्तार आरोपी और बरामदगी

पुलिस ने सोनू शर्मा, सतीश पांडेय, साहिल विश्वकर्मा, धर्मेंद्र सिंह, तनिष गुप्ता, अमित सिंह, अमित कुमार और आशीष कुमार को गिरफ्तार किया है। इन सभी के पास से कुल 9 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं।

देवेश तिवारी की रिपोर्ट

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