Advertisement

देवउठनी एकादशी पर गंगा बैराज अटल घाट पर लाखों ने किया स्नान

देवउठनी एकादशी सभी 24 एकादशी में सबसे शुभ और मंगलकारी मानी जाती है। इस एकादशी को देवोत्थान एकादशी, देव प्रबोधिनी एकादशी और डिठवन एकादशी के नाम से भी जाना जाता हैं।  इस दिन से सनातन धर्म में सभी मांगलिक कार्य होने प्रारंभ हो जाते हैं क्योंकि श्री हरि निंद्रा से जाग कर सभी भक्तों की मनोकामना को पूर्ण करते हैं और इस दिन भगवान हरि के एक रूप शालिग्राम का तुलसी जी से विवाह भी किया जाता है।
आज 4 नवंबर, 2022 को देवउठनी एकादशी है। यह सभी 24 एकादशी में सबसे शुभ और मंगलकारी मानी जाती है। इस एकादशी को देवोत्थान एकादशी, देव प्रबोधिनी एकादशी और डिठवन एकादशी के नाम भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु 4 महीने की निद्रा के बाद जाग्रत होते हैं। ऐसे में जगत के पालनहार के जागते ही 4 महीनों से रुके हुए सभी तरह के मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाएंगे। धार्मिक मान्यता है कि सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाने वाली इस एकादशी का व्रत करने वालों को स्वर्ग और बैकुंठ की प्राप्ति होती है। इस दिन गंगा बैराज अटल घाट पर लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाकर भगवान हरि विष्णु माया तुलसी व गंगा मैया की पूजा आराधना कर प्रसाद एवं दान किया। सुबह 4:00 बजे से अटल घाट गंगा बैराज पर श्रद्धालुओं के उमड़ने लगी भीड़ और सभी ने अपने घर परिवार की सुख सलामती की प्रार्थना की वही गंगा मैया के जयकारा और प्रभु राम की जयकार कर मां गंगा का आभार व्यक्त किया।

WhatsApp Image 2023-11-24 at 3.32.09 PM
Deepak EV Motors sale banner
nsingh