कानपुर- हुसैनी फेडरेशन के तत्वाधान में हुसैन दिवस समारोह का 48वां दौर का अज़ीमुश्शान इजलास रजबी ग्राउण्ड परेड मैदान कानपुर में सम्पन्न हुआ। पहला जलसा शुरू होने से पहले दिन में 11 बजे बेवाओं और यतीम लड़कियों के लिये सिलाई मशीन असहाय लोगों के लिये कम्बल कुरान्दाजी (लॉटरी) द्वारा मौलाना अजहर अब्बास व मौलाना नसीम अब्बास के कर कमलों द्वारा पर्ची निकाली गई। जलसे का आगाज़ कुरआने पाक की तिलावत से मौलाना अजहर अब्बास ने किया।
कार्यक्रमों दो सत्रों में सम्पन्न हुआ, पहला जलसा 12 बजे दिन में व दूसरा जलसा सायं 7 बजे शुरू हुआ दोनों जलसों का आगाज़ तिलावते कुराने पाक से हुआ। जलसे में उलमां ए कराम ने हजरत इमाम हुसैन की कुरबानी पर विस्तार से रोशनी डाली शोराय कराम ने अपने कलाम के द्वारा शहीदाने करबला को नजराने अकीदत पेश किया। पहले जलसे का उदघाटन जनाब मौलाना मेराज मेहंदी मंगलौरी ने किया। उन्होंने हजरत इमाम हुसैन को नजराने अकीदत पेश करते हुये कहा कि इमाम ने करबला के मैदान में इंसानियत को बचाने के लिये जो अज़ीम कुरबानी पेश की उसको कभी भुलाया नही जा सकता। इजलास की अध्यक्षता नदीम अब्बास जैदी पूर्व चेयरमैन नगर पंचायत नौगामा सादात ने कहा कि मैं हजरत इमाम हुसैन को अपनी खिराजे अकीदत पेश करता हूँ। मेरे पास ऐसे अलफाज़ नही हैं और न ही दुनिया की कोई ज़बान ऐसी है कि जिसके द्वारा अकीदत को बयान कर सकूं। उन्होंने आगे कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने इंसानियत की रक्षा के लिये हजारों इन्सानियत दुश्मन मानव विरोधी ताकतों के मुकाबले में केवल अपने 72 साथियों के साथ अपनी अज़ीम कुरबानी पेश की और विजय प्राप्त की। लखनऊ से पधारे मौलाना एजाज अतहर ने कहा कुरआने पाक में अल्लाह ने फरमाया कि बातिल परस्त के खिलाफ ईमान वाले सच्चे लोग सीसापिलाई दीवार की तरह खड़े हो जायेंगे। मौलाना ने कहा कि यह इशारा करबला की घटना की तरफ है। लखनऊ से पधारे आल इण्डिया शिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना मिर्जा यासूब अब्बास ने कहा कि आज फिर इन्सानियत के दुश्मन मानव विरोधी ताकतें इस्लाम की तस्वीर को दागदार करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस्लाम मजलूमों की मदद करने वालों का धर्म है जालिमों का नहीं । उन्होंने आगे कहा कि इस्लाम हमेशा से आतंकवाद के खिलाफ रहा है। कुरआन में कहीं भी नही लिखा है कि बेगुनाहों का कत्ल किया जाये। दिल्ली से तशरीफ लाये मौलाना कुमर सुलतान ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ दम तोड़ती हुई इंसानियत और इस्लाम को बचाने के लिये करबला के मैदान में जो कुरबानी पेश की वह दुनिया हमेशा याद रखेगी। दिल्ली से पधारे मौलाना गजनफर अब्बास साहब तूसी ने कहा कि करबला जैसे वीराने जंगल में भी इंसानियत के खिलाफ इराक का शासक यजीद अपनी बात नहीं मनवा सका यही इमामे हुसैन की विजय है और मानव विरोधी ताकतों की शिकस्त है। फैजाबाद से तशरीफ लाये मौलाना वसी हसन खां ने कहा कि इमाम आली मुकाम हजरत इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ इन्सानियत और सच्चाई को बचाने के लिये अपना भरा घर कुर्बान कर दिया उन्होने कहा कि इस अज़ीम कुरबानी ने इस्लाम का सर हमेशा के लिये ऊंचा कर दिया। दिल्ली से तशरीफ लाये मौलाना मो० असकरी ने कहा कि करबला की कुरबानी हमें जालिम की आंखों में आंखे डाल कर जिन्दा रहने का सलीका सिखाती है। उन्होंने आगे कहा कि दुनिया के इंसानों को इमामे हुसैन के पदचिन्हों पर चलने की कोशिश करनी चाहिये। और 48वें इजलास को सम्बोधित करते हुये मौलाना रईस अहमद जारचवी में हजरत इमाम हुसैन को अकीदत का नजराना पूरी तफसील से पेश किया। झारखण्ड से तशरीफ लाये मौलाना तहजीबुल हसन ने कहा कि अराकीने हुसैनी फेडरेशन मुबारक बाद के मुश्तहक हैं। इतने बड़े जलसे का आयोजन करते हैं उन्होंने कहा कि केवल हुसैन दिवस मनाना काफी नहीं है।
ज़रूरत इस बात की है कि हम इमामे हुसैन की शहादत से सबक हासिल करें। इमाम ने मानव विरोधी ताकतों के खिलाफ अपनी व अपने 72 साथियों की अजीम कुरबानी पेश की। आज हम प्रतिज्ञा करें कि इंसानियत के दुश्मन ताकतों को हमेशा पराजित करते रहेगें और 48वें इजलास को सम्बोधित करते हुये पास्टर डायमण्ड युसुफ चेयरमैन मायनारिटी कमेटी कानपुर ने भी अपनी नूरानी तकरीर से करबला के 72 शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित की। इसी तरह सरदार मोहकम सिंह पूर्व प्रधान गुरूद्वारा कमेटी कानपुर ने कहा कि हजरत इमामे हुसैन ने अपनी कुरबानी से मानवता का सर हमेशा के लिये ऊंचा कर दिया कयामत तक के लिये उनके नक्शे कदम पर चलने वाले नाकाम नही होगें। बाहर से आये शायरों ने अपने कलाम के द्वारा बारगाहे हुसैनी में श्रद्धासुमन अर्पित किये जिसमें डा० ऐनुल हसन, जनाब मेराज मंगलौरी, असद नसीराबादी और गुलशन त्रिपाठी थे। इस पवित्र अवसर पर मुख्य अतिथिगण में मौलाना मेराज मेहंदी, शबाब हुसैन, काज़िम मेहंदी, चेयरमैन, असद इराकी, अब्दुल जे. मंसूरी, रूमी हसन, एम.एल.ए., अशरफ सैफी, हैदर अब्यास चांद ने भी हजरत इमामे हुसैन की बारगाह में नजराने अकीदत पेश किया। इस अवसर पर हुसैनी मेगजीन का विमोचन भी किया गया। जलसे में गरीब विधवाओं व यतीम लड़कियों को सिलाई मशीने वितरित की गई और असहाय लोगों को कम्बल का वितरण किया गया। यू.पी. बोर्ड के हाईस्कूल व इण्टर मीडियट की परीक्षा में वरीयता प्राप्त नं० लाने वाले 6 विद्यार्थियों को 1001/- रू0 का इनाम दे कर सम्मानित किया गया। जलसे में लंगरे हुसैनी (भोजन) की उचित व्यवस्था की गई थी। हुसैन फैडरेशन ने इस बार भी कुरान्दाजी (लॉटरी) द्वारा 2 अकीदतमंदों को करबलाये मुअल्ला इराक जाने की व्यवस्था की। संचालन की जिम्मेदारी डॉ0 नैय्यर जलालपुरी ने अंजाम दी ।
इस अवसर पर चेयरमैन कबीर जैदी अध्यक्ष अली अखतर रिज़वी उपाध्यक्ष हाजी मुंसिफ अली रिज़वी, कोषाध्यक्ष रईसुल हसन रिज़वी, मुशीर अहमद आब्दी, इसरार हुसैन, एहसान हुसैन, मन्ज़र हुसैन, मुशर्रफ हुसैन डा० जुल्फिकर अली रिज़वी, इफ्तिखार हुसैन, जामिन अब्बास, आसिफ अब्बास, यूसुफ जाफरी, कमर अब्बास रिज़वी, विकार हसन, इब्ने इसन बबलू, अफसर हुसैन, और मास्टर मो० असगर, नासिर रिज़वी, मज़हर अब्बास, रानू नकवी, अली रिज़वी, रिजवान मुशलाक, मुजीबुल हसन, मसरूर हुसैन, सादत अली, नवाब शब्बीर साहब, अली मेंहदी, मुन्नू भाई, शमीम पंजेतन, ताजदार हुसैन, जहूर नकवी, मो0 ज़की, हसन रजा, शोएब जैदी, मीसम जैदी, कुमैल, नाज़ आलम, अनवार जाफरी, अयाज़ हैदर रिज़वी, यावर अब्बास उपस्थित थे


















