कानपुर नगर।
मध्य प्रदेश के इंदौर जनपद में दूषित पेयजल आपूर्ति से बड़ी संख्या में नागरिकों के बीमार होने की घटना को गंभीरता से लेते हुए एक संगठन द्वारा कानपुर नगर में भी ऐसी किसी घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई है।
संगठन ने कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण में देश में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले इंदौर जैसे नगर में दूषित जल से नागरिकों का बीमार होना अत्यंत चिंताजनक है। संगठन ने प्रभावित लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए कानपुर जैसे बड़े महानगर में पूर्व से ही प्रभावी व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया।
संगठन द्वारा सुझाव दिया गया है कि नगर में दूषित जल आपूर्ति की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए एक हेल्प-डेस्क की स्थापना की जाए तथा एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाए। इससे नागरिकों की शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लेकर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जा सकेगी।
बताया गया कि कानपुर नगर की सीमा अत्यधिक विस्तारित हो चुकी है, जहां कई रिहायशी क्षेत्रों में पम्पिंग स्टेशनों तथा अन्य क्षेत्रों में टंकियों के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है। कई टंकियों की वर्षों से सफाई नहीं हुई है, वहीं एटीएम वाटर संयंत्रों की भी लगभग पाँच वर्षों से किसी विभाग द्वारा जांच नहीं कराई गई है, जो जनस्वास्थ्य के लिए खतरा है।
नववर्ष के अवसर पर संगठन के पदाधिकारियों ने महाप्रबंधक महोदय से भेंट कर पुष्प देकर स्वागत किया तथा ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि हेल्प-डेस्क का व्यापक प्रचार किया जाए, जहां शिकायतकर्ता दूषित पानी का 500 एमएल नमूना, आधार कार्ड की छायाप्रति एवं जलकर रसीद के साथ शिकायत दर्ज करा सकें, ताकि दूषित जल आपूर्ति का शीघ्र समाधान किया जा सके।
इस अवसर पर अखिलेश सिंह, बजरंगी लाल यादव, मनोज कुमार, सानू अहमद, विक्की, मुन्ना, सलीम, जगदीश सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
देवेश तिवारी की रिपोर्ट


















