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अमृता ने लॉन्च किया सुनने, समझने और मेडिकल रिकॉर्ड लिखने वाला एआई क्लिनिकल असिस्टेंट ‘मेडसम’

डॉक्टर–मरीज के बीच समय को बेहतर बनाने और मरीजों को उनकी अपनी आवाज़ और भाषा में चिकित्सा जानकारी देने के लिए तैयार किया गया एक एआई सिस्टम

दिल्ली-एनसीआर, फरवरी 2026: अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा में एक बड़ी समस्या व्याप्त है। दरअसल चिकित्सक कई साल पढ़ाई करते हैं और फिर मरीज़ों का इलाज करना सीखते हैं, लेकिन बहुत सारे डॉक्टरों का ज्यादा समय मरीजों के बारे में टाइपिंग और कागजी कार्रवाई करने में चला जाता है। एक व्यस्त ओपीडी में एक कार्डियोलॉजिस्ट कई मरीज़ों को देखता है, फिर भी वह प्रलेखन में काफी लंबा समय बिताता है। अमृता ने अब इस स्थिति को बदलने का बीड़ा उठाया है।
अमृता ने मेडसम नाम की एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्लीनिकल सहायता शुरू की है। यह एआई असिस्टेंस चिकित्सक और मरीज़ की बातचीत सुनता है और उन्हें अपने आप कई भारतीय भाषाओं में स्ट्रक्चर्ड मेडिकल नोट्स, प्रिस्क्रिप्शन और मरीज़ के लिए आसान लहजे में पूरी जानकारी देता है।
मेडसम को अमृता टेक्नोलॉजीज और अमृता हॉस्पिटल्स के साथ मिलकर अमृता विश्व विद्यापीठम, फरीदाबाद के स्कूल ऑफ़ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने विकसित किया है। इसे डॉक्टरों और मरीज़ों दोनों को सहयोग करने के लिए बनाया गया है। मेडसम का इस्तेमाल करने से डॉक्टरों का समय बचता है और मरीज़ों को उनकी देखभाल को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है।
चिकित्सक का समय बचाना और मरीज को समझाने में मदद करना
मेडसम आधुनिक हेल्थकेयर की दो सबसे बड़ी समस्याओं का समाधान करता है। एक चिकित्सक-मरीज़ के बीच के कम समय और दूसरी मेडिकल जानकारी को सभी तक बराबर न उपलब्ध हो पाना, इन दो समस्याओं के लिए मेडसम समाधान पेश करता है.
1- चिकित्सक-मरीज के सम्बन्ध को समय देना
एक ऐसे परामर्श के बारे में सोचिए जहाँ चिकित्सक कंप्यूटर स्क्रीन नहीं देख रहा हो, वह न टाइपिंग, न डिक्टेशन, और न ही बाद के लिए कोई कागजी कार्रवाई कर रहा हो। मेडसम पीछे चुपचाप इन सारे कामों को करता है और परामर्श खत्म होने तक क्लीनिकल नोट्स, प्रिस्क्रिप्शन और अस्पताल के दस्तावेज़ तैयार कर देता है। इससे चिकित्सक पूरी तरह से मरीज़ की बात सुनने, सोचने और उसकी देखभाल करने पर ध्यान दे पाते हैं और प्रलेखन इस असिस्टेंस की मदद से खुद-ब-खुद संभल जाता है।
2- मरीज़ की उनकी भाषा में मेडिकल जानकारी देना
मेडसम परामर्श को आसान लहजे में स्थानीय भाषा में मरीज को बताता है। यह मरीज़ की उसकी अपनी भाषा में वॉयस रिकॉर्डिंग के तौर पर जानकारी शेयर करता है। हिंदी, तमिल, बंगाली, या दूसरी अन्य भारतीय भाषाओँ को यह सपोर्ट करता है। चाहे मरीज़ गाँव का कोई बुज़ुर्ग हो या कोई युवा किसान, वे अपनी मेडिकल जानकारी अपनी भाषा में जितनी बार चाहें उतनी बार स्पष्ट तरीके से सुन सकते है।

पहले से ही मेडिकल फील्ड में मेडसम का हो रहा है उपयोग
मेडसम सिर्फ़ एक लैब प्रोटोटाइप नहीं है। इसे पहले से ही कई मरीज़ों पर इस्तेमाल और टेस्ट किया जा रहा है। इसका उपयोग अमृता हॉस्पिटल के अलग-अलग विभाग में किया जा रहा है। इन विभाग में गायनेकोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, न्यूरोसर्जरी और पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी शामिल हैं। यह सिस्टम तीन जुड़े हुए प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए चलता है जैसे एक डॉक्टर डैशबोर्ड, एक पेशेंट ऐप और एक एडमिनिस्ट्रेटिव कंसोल के जरिये यह काम करता है।
अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद के डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ सचिन गुप्ता ने इस बारे में बताते हुए कहा, “एक व्यस्त ओपीडी में पेपरवर्क में डॉक्टर का लगभग एक-तिहाई समय लग जाता है। इसमें ज़रूरी जानकारी छूट सकती हैं, और मरीज़ अक्सर जल्दी देखते हैं। प्रोफ़ेसर कमल बिजलानी और एआई टीम के साथ मिलकर काम करके हमने एक ऐसा समाधान बनाया है जो वाकई में डॉक्टरों को ज्यादा समय देता है ताकि वे इस समय को वहाँ लगा सकें, मतलब मरीज के साथ समय दे सकें क्योंकि यहाँ यह समय सबसे ज़्यादा ज़रूरी होता है।”
अमृता विश्व विद्यापीठम के स्कूल ऑफ़ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के डीन प्रो. कमल बिजलानी ने कहा, “जब डॉक्टरों ने अपनी मुश्किलें बताईं, तो हम समझ पाए कि भारत के लिए ही इस तरह का समाधान बनाना होगा। यह समाधान मात्र सिर्फ़ टेक्नोलॉजी में ही नहीं, बल्कि असल ज़िंदगी में भी इस्तेमाल के लिए होगा। मेडसम भारत के अपने बड़े लैंग्वेज मॉडल, भारत-जेन पर चलता है, और इसे अमृता हॉस्पिटल्स में वास्तविक क्लिनिकल सेटिंग्स में टेस्ट किया गया है। हमने यह भी सुनिश्चित किया कि मेडिकल जानकारी मरीज़ की अपनी भाषा में वॉयस रिकॉर्डिंग के तौर पर शेयर की जाए। हमारी चांसलर अम्मा के मार्गदर्शन में, अमृता का मूल मंत्र है करुणामय शोध और समाज पर अधिकतम सकारात्मक प्रभाव और मेडसम उसी सोच की सीधी अभिव्यक्ति है।”
भारत-जेन द्वारा पावर्ड और इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में प्रदर्शित
मेडसम को हाल ही में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 (17 फरवरी) में एक श्रेष्ठ हेल्थकेयर एप्लिकेशन के तौर पर पेश किया गया था। इसे भारत-जेन के पब्लिक लॉन्च के दौरान दिखाया गया था। यह भारत का राष्ट्रीय स्तर पर विकिसित किया गया बड़े लैंग्वेज मॉडल्स का परिवार है, जिसे भारतीय भाषाओं, संस्कृति और ज़रूरतों को समझने के लिए बनाया गया है।
मेडसम परम-17बी भारत-जेन मॉडल पर चलता है। यह इसे भारत के अपने एआई सिस्टम से पूरी तरह पावर्ड पहले क्लीनिकल एआई टूल्स में से एक बनाता है।
यह प्रदर्शन डीएसटी के माननीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह; भारत सरकार के प्रिंसिपल वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद; डीएसटी के सचिव प्रोफेसर अभय करंदीकर; एमईआईटीवाय के सचिव श्री एस. कृष्णन और इंफोसिस के को-फाउंडर डॉ. क्रिस गोपालकृष्णन की मौजूदगी में हुआ।

राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान अमृता विश्व विद्यापीठम, अमृता टेक्नोलॉजीज, अमृता हॉस्पिटल्स और भारतजेन की मेडसम टीमों के सामूहिक प्रयास को दर्शाती है। यह इस बात का प्रतीक है कि जब रिसर्च इंस्टीट्यूशन, डॉक्टर और भारत की अपनी एआई टेक्नोलॉजी मिलकर मरीजों की बेहतर सेवा करते हैं तो नवाचार होने से कोई नहीं रोक सकता है।

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