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UGC प्रावधानों और आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ कानपुर में फूटा युवाओं का आक्रोश

 

हजारों युवाओं ने निकाला ऐतिहासिक मशाल मार्च, मोतीझील से गोल चौराहे तक गूंजा विरोध का स्वर; देशव्यापी आंदोलन का लिया संकल्प
UGC के नए प्रावधानों को वापस लेने और आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर सोमवार को कानपुर की धरती पर युवाओं का आक्रोश सड़कों पर उतर आया। आरक्षण सुधार आंदोलन कानपुर के बैनर तले हजारों युवाओं ने मोतीझील से गोल चौराहे तक विशाल मशाल मार्च निकालकर सरकार के समक्ष अपनी मांगों की जोरदार दस्तक दी। हाथों में जलती मशालें, चेहरे पर आक्रोश और व्यवस्था में बदलाव का संकल्प लिए युवाओं का हुजूम देर शाम तक शहर में चर्चा का विषय बना रहा।मशाल आक्रोश मार्च की शुरुआत मोतीझील स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा से हुई। बड़ी संख्या में युवा यहां एकत्र हुए और मशालें लेकर गोल चौराहे की ओर बढ़े। रास्ते भर प्रदर्शनकारियों ने UGC के नए प्रावधानों पर पुनर्विचार तथा आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर नारे लगाए। मार्च का समापन गोल चौराहे स्थित शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा के समक्ष हुआ।मशालों के साथ बुलंद हुई ‘बदलाव’ की आवाज
प्रदर्शनकारियों के हाथों में जलती मशालें केवल विरोध का प्रतीक नहीं थीं, बल्कि युवाओं ने इन्हें व्यवस्था में बदलाव की अपनी मांग का प्रतीक बताया। आंदोलन में शामिल युवाओं का कहना था कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अवसरों को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान संवाद और व्यापक सुधार के माध्यम से किया जाना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि उनका आंदोलन किसी जाति अथवा समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं जिसमें सामाजिक न्याय के साथ समान अवसर, पारदर्शिता और योग्यता को भी उचित महत्व मिले। वक़्ताओ ने कहा कि कानपुर से उठी आवाज अब देश तक जाएगी, समापन स्थल पर आंदोलनकारियों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि आरक्षण सुधार की मांग को अब केवल कानपुर तक सीमित नहीं रहने दिया जाएगा। युवाओं ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से देशव्यापी स्वरूप देने का ऐलान किया।वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से जनजागरण, संवाद और शांतिपूर्ण आंदोलनों के माध्यम से देशभर के युवाओं को इस मुद्दे से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है, आंदोलन में शामिल युवाओं ने कहा कि यह केवल आज की पीढ़ी का प्रश्न नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। उनका कहना था कि शिक्षा और रोजगार जैसे क्षेत्रों में नीतियां ऐसी होनी चाहिए जो समाज के सभी वर्गों के लिए न्यायपूर्ण और पारदर्शी अवसर सुनिश्चित करें।
युवाओं ने सरकार से मांग की कि UGC के नए प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए और आरक्षण व्यवस्था की मौजूदा संरचना की व्यापक समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाएं।
अंत में मशाल उठाकर लिया संघर्ष का संकल्प, गोल चौराहे पर आयोजित समापन कार्यक्रम में युवाओं ने हाथों में मशाल लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। आंदोलनकारियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं और व्यक्तिगत त्याग से भी पीछे नहीं हटेंगे।
हालांकि आंदोलन के आयोजकों ने स्पष्ट किया कि संघर्ष को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। उनका कहना था कि जनसमर्थन जुटाकर सरकार तक अपनी बात मजबूती से पहुंचाना ही आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य है।
कानपुर में हुए इस विशाल मशाल मार्च ने आरक्षण और UGC से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रही बहस को एक नया राजनीतिक-सामाजिक आयाम देने का प्रयास किया है। आंदोलनकारियों का दावा है कि आने वाले दिनों में देश के अन्य शहरों में भी जनजागरण और आंदोलन की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।मशाल आक्रोश मार्च के अंत में आंदोलनकारियों ने दोहराया कि “यह शुरुआत है, अंत नहीं।” उनका कहना था कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार नहीं करती, तब तक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाया जाता रहेगा।कानपुर की सड़कों पर देर शाम तक दिखाई देती मशालों की कतार ने आंदोलनकारियों के इरादे स्पष्ट कर दिए—आरक्षण व्यवस्था में सुधार और UGC के प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग को अब राष्ट्रीय बहस के केंद्र तक पहुंचाने की तैयारी है। मुख्य रूप से अरविंद राज त्रिपाठी, प्रदेश मंत्री, युवा मोर्चा, रविंद्र पाटनी, पूर्व महापौर्ज सोनू पाण्डेय, आशुतोष दीक्षित, राघवेंद्र मिश्रा, पूर्व पार्षद, धीरू त्रिपाठी, पार्षद, भानु भदौरिया, पूर्व बार महामंत्री, पीयूष मिश्रा, योगेंद्र अग्निहोत्री, आलोक मिश्रा, अनुराग मिश्रा ऋषि,

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