केडीए उपाध्यक्ष के खिलाफ केडीए बोर्ड के सदस्य ने लगाए गंभीर आरोप

कानपुर। केडीए में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करने के कई प्रयास शासन स्तर पर किये गए मगर रिजल्ट शून्य रहा केडीए में फैले भ्रष्टचार के खिलाफ अब केडीए बोर्ड सदस्य व भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष राम लखन रावत ने खुली चुनौती दी है। राम लखन रावत के शिकायती पत्र ने केडीए समेत शासन स्तर तक हड़कंप मचा दी है। क्योंकि राम लखन रावत ने सीधा आरोप केडीए उपाध्यक्ष अरविंद सिंह पर ही लगाया है। जिससे कानपुर विकास प्राधिकरण में हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों की माने तो इस मामले में गोपनीय जांच भी शुरू होने के संकेत मिले है। केडीए उपाध्यक्ष अरविंद सिंह समेत कई अफसरों के खिलाफ बीजेपी नेता व केडीए बोर्ड के सदस्य राम लखन रावत द्वारा की गई शिकायत पर केडीए में खींचतान मची हुई है। किंतु सभी को जुबान पर एक ही जवाब है, साहब (केडीए उपाध्यक्ष) भी शासन में अच्छी पकड़ रखते है। इस तरह के आरोपों से कुछ नहीं होने वाला है।अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश मंत्री राम लखन रावत ने एक शिकायती पत्र शासन के तमाम अफसरों को भेजा है। जिसमें कई गंभीर आरोप लगाये है। इन आरोपों में सबसे बड़ा आरोप प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट पीएमएवाई से जुड़ा है। जिसको जांच बेहद जरूरी है। क्योंकि राम लखन रावत के शिकायती पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सैकड़ों आवास जवाहरपूरम में बनने थे जिसकी निविदा पिछले वर्ष मार्च-अप्रैल में खोल दी गयी थी। अभियंतत्रण विभाग के नियमानुसार 90 दिन के अंदर निविदा का निस्तारण होना चाहिया था।रिश्वत मांगने का भी आरोप लगाया है!करीब चार सौ करोड़ की इस योजना में अगस्त 2021 में चार्ज लेने वाले आईएएस अफसर जब तत्कालीन मुख्य अभियंता चक्रेश जैन ने विरोध किया तो उन्हें हटा कर अपने मोहरों को सेट किया गया। जिसके बाद घूस की रकम के वारे न्यारे हुए। राम लखन रावत ने यह भी आरोप लगाया है कि नियमानुसार जो निविदा 90 दिन में निस्तारित होनी थी, तो उस निविदा को स्वीकृत 10 माह बाद कैसे प्रदान की गई। राम लखन रावत द्वारा लगाये गये आरोपों में कितनी सच्चाई है ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा। मगर राम लखन रावत के शिकायती पत्र ने केडीए से लेकर शासन में हड़कंप जरूर मचा दी है।

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