कानपुर, 4 मई 2026। सर्जरी के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए रीजेंसी हेल्थ कानपुर ने शहर की पहली बिना निशान वाली थायरॉइड सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की। अस्पताल ने इसके लिए ट्रांसओरल एंडोस्कोपिक थायरॉइडेक्टॉमी वेस्टिबुलर अप्रोच (TOETVA)तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसमें गर्दन पर कोई चीरा लगाए बिना थायरॉइड ग्लैंड को निकाला जाता है। यह जटिल प्रक्रिया सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. जितिन यादव द्वारा की गई।
यह कानपुर में TOETVA तकनीक से की गई पहली दागरहित थायरॉइड सर्जरी है।
मरीज़ की पहले ही थायरॉइड लोबेक्टोमी हो चुकी थी, जिसमें थायरॉइड ग्लैंड का एक हिस्सा निकाला गया था। बाद में जांच में फॉलिक्युलर कार्सिनोमा यानी थायरॉइड कैंसर की पुष्टि हुई। बची हुई थायरॉइड ग्लैंड को पूरी तरह निकालने के लिए कंप्लीट थायरॉइडेक्टॉमी करनी थी, जो पहले की सर्जरी के कारण और भी जटिल हो गई थी। ऐसे में TOETVA तकनीक ने न केवल कैंसर का प्रभावी इलाज संभव बनाया बल्कि गर्दन पर किसी भी तरह का निशान भी नहीं छोड़ा।
TOETVA एक एडवांस्ड मिनिमली इनवेसिव तकनीक है, जिसमें सर्जन होंठ और मसूड़ों के बीच मुँह के अंदरूनी हिस्से से थायरॉइड ग्लैंड तक पहुंचते हैं। इससे गर्दन पर दिखने वाले निशान से बचा जा सकता है और साथ ही ऑन्कोलॉजिकल सुरक्षा भी बनी रहती है। कॉस्मेटिक रूप से बेहतर परिणाम और तेज़ रिकवरी के कारण इसे दुनिया भर में तेजी से अपनाया जा रहा है।
डॉ. जितिन यादव ने बताया कि _“यह तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण केस था क्योंकि मरीज़ की पहले सर्जरी हो चुकी थी। TOETVA से हम गर्दन में चीरा लगाए बिना बचे हुए थायरॉइड टिशू को सुरक्षित रूप से निकाल पाए। यह तकनीक मरीज़-केंद्रित सर्जिकल देखभाल की दिशा में एक बड़ा बदलाव है, जहाँ बेहतर क्लीनिकल परिणाम के साथ शरीर पर कम निशान रहता है।”_
उन्होंने आगे कहा कि _“कम चीर-फाड़ वाली विधियाँ थायरॉइड सर्जरी के तरीके को बदल रही हैं। ये कैंसर के इलाज में असरदार होने के साथ-साथ मरीज़ की जीवन गुणवत्ता को भी बेहतर बनाती हैं।”_
सर्जरी के बाद मरीज़ की रिकवरी संतोषजनक रही। पैराथायरॉइड हार्मोन और कैल्शियम का स्तर स्थिर है, जो थायरॉइड सर्जरी के बाद शरीर के कैल्शियम संतुलन के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। नियमित फॉलो-अप में मरीज़ की स्थिति लगातार बेहतर बनी हुई है।
डॉ. यादव ने एनेस्थीसिया और ऑपरेशन थिएटर टीम के सहयोग की भी सराहना की, जिन्होंने इस जटिल प्रक्रिया को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह उपलब्धि कानपुर में एडवांस्ड और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के बढ़ते चलन को दर्शाती है और रीजेंसी हेल्थ की आधुनिक व मरीज़-केंद्रित देखभाल की प्रतिबद्धता को भी उजागर करती है।
देवेश तिवारी की रिपोर्ट


















