उत्तर प्रदेश के सेवानिवृत्त एआरटीओ ललित कुमार के लखनऊ आवास पर विजिलेंस विभाग द्वारा की गई 35 करोड़ की ऐतिहासिक बरामदगी का कनेक्शन अब कानपुर से सीधा जुड़ता नजर आ रहा है। चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ललित कुमार के भ्रष्टाचार और अनियमिताओं का चिट्ठा सालों पहले ही कानपुर में खुलना शुरू हो गया था, जब वे वहां रीजनल इंस्पेक्टर आरआई के पद पर तैनात थे।
कानपुर में सजग पत्रकार ने खोली थी पोल, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया तक पहुंचा था मामला
ताजा दस्तावेजों से साफ हुआ है कि साल 2019 में ही ललित कुमार के खिलाफ कानपुर के आरटीओ कार्यालय सर्वोदय नगर, काकादेव में तैनाती के दौरान गंभीर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। ‘अलर्ट टीम’ अखबार के सम्पादक के के साहू और रिपोर्टर मो आमिर द्वारा ललित कुमार के खिलाफ की गई इस शिकायत का संज्ञान खुद प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने लिया था। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा जारी नोटिस के मुताबिक, इस मामले में ललित कुमार और शिकायतकर्ता को आमने-सामने बिठाकर 18 दिसंबर 2019 को प्रयागराज के सर्किट हाउस में ‘इन्क्वायरी कमेटी’ के सामने सुनवाई के लिए भी तलब किया गया था। उस वक्त पत्रकार द्वारा दिए गए सबूतों और शिकायतों ने ही ललित कुमार के कारनामों की नींव हिला दी थी।
सालों की जांच के बाद विजिलेंस का महा-एक्शन
शिकायतों का यह सिलसिला आगे बढ़ता रहा और आखिरकार साल 2024 में एंटी-करप्शन पुलिस स्टेशन कानपुर रेंज में ललित कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का एफआईआर दर्ज हुई इसी एफआईआर के आधार पर कोर्ट से वारंट लेकर विजिलेंस की टीम ने लखनऊ के अलीगंज स्थित उनके आवास पर छापा मारा। आपको बता दे कि
भ्रष्टाचार की जड़ें कानपुर से ही थीं गहरी
विजिलेंस के अधिकारियों का मानना है कि कानपुर आरटीओ में साढ़े तीन साल से अधिक समय तक रीजनल इंस्पेक्टर और बाद में प्रमोट होकर एआरटीओ रहने के दौरान ललित कुमार ने काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा इकट्ठा किया था। सालों पहले स्थानीय स्तर पर उठी आवाज और शिकायतों को जब अधिकारियों ने अनसुना किया, तो अब विजिलेंस के इस महा-एक्शन ने साबित कर दिया है कि कानून के हाथ देर से ही सही, लेकिन पहुंचते जरूर हैं।
फिलहाल विजिलेंस की टीम ललित कुमार के कानपुर कार्यकाल के दौरान के सभी पुराने मामलों, फाइलों और इस पीसीआई नोटिस से जुड़े इनपुट को भी अपनी जांच में शामिल कर आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है।


















