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भारत रत्न लता मंगेशकर जी का मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया

हिंदुस्तान ने खो दिया भारत रत्न, मगर कोई नहीं भुला पाएगा ” ए मेरे वतन के लोगों जरा याद करो” के सदाबहार मुंह पर रहने वाले देश भक्ति के गीत की गायिका लता दी को! बिरले होती है ऐसी हस्तियां जो देश को ही नहीं विश्व को अपनी पहचान देने वाली लता दी ने अभिमान और वैभव से रखा परहेज। पूरा देश शौक मग्न, शाम को पीएम की मौजूदगी में देश देगा अंतिम विदाई। पर हमारे दिल में बसी रहेंगी लता जी। पूरे देश में दो दिन का राष्ट्रीय शौक, अदभुद संयोग ये कैसा संयोग, अजीब सी हो गई आज 6 फरवरी की तिथि की सहायता से गीत को लिखने वाले कवि प्रदीप की जयंती पर और इस गीत को गाने वाली स्वर =कोकिला लता जी की पुण्यतिथि के रूप में भी याद की जाती रहेगी। गोवा के मंगेशी गाँव एक मंदिर के पुजारी के बेटे दीनानाथ मंगेशकर को मराठी थियेटर से प्रेम था।
इस प्रेम के वशीभूत दीनानाथ ने अपनी खुद की थियेटर मंडली बनाकर पूरे भारत का भ्रमण शुरू किया। भ्रमण के इस दौर में इंदौर के सिक्ख मोहल्ले में प्रवास के दौरान 28 सितबंर 1929 को उनकी पत्नी शेवंती ने एक बेटी को जन्म दिया ! दीनानाथ ने अपनी बेटी का नाम दिवंगत बहन लता के नाम पर लता ही दे दिया।
कुछ समय बाद जब पिता दीनानाथ का निधन हुआ तब लता तेरह बरस की थी ! पिता के ना रहने पर अपने से छोटे भाई बहनो उषा ,आशा ,मीना और हृदयनाथ की ज़िम्मेदारी लता के ज़िम्मे आई ,और परिवार का पेट भरने के लिये इस बड़ी बड़ी आँखों वाली छोटी सी साँवली लड़की को फ़िल्मों में एक्टिंग करना पड़ी ! पर अपना खुद का घर बसाने का ख़्याल छोड़कर अपने भाई बहनों की गुजर बसेरा करने के कारण वे स्कूल नहीं जा पाई। 1947 में बंसत राव जोगलेकर ने “”फ़िल्म आपकी सेवा”” में लता जी को गाने का मौक़ा दिया ! लोग इस नई आवाज़ के जादू से मंत्र मुग्ध हो गए। 1949 में बनी एक फिल्म “महल “के लता जी का गाया हुआ गाना “आयेगा आने वाला” हर व्यक्ति की जुबां पर गाया जाने लगा। मशहूर हुआ फिर गानों का जो दौर शुरू हुआ वह उन्हें आगे बढ़ाता रहा।
लता जी ने बीस भाषाओं में पचास हजार से ज़्यादा गाने गाये ! लता जी को विश्व भर के कई सम्मान और उपाधियों से नवाजा गया। जिनकी संख्या लता दी को भी याद नहीं थी।
लता दी भारत की वो रत्न थी जिसके बारे में कभी बड़े गुलाम अली खाँ साहब ने कहा था कि जो कमाल हम तीन घंटे में कर पाते हैं उसे लता जी तीन मिनटों में पैदा कर देती है !

ऐसे में यह मानने का जी नहीं करता कि लग जा गले गाने वाली लता मंगेशकर हमें छोड़ गई हैं ! वो चाहे भी तो हमसे दूर जा ही नहीं सकती ! लेकिन आठ जनवरी से जीवन मृत्यु की लड़ाई में भले ही वो नहीं जीत पाई मगर हम सभी के दिलो पर उन्होंने अपनी कभी न हारने वाली जीत की स्मृति अंकित कर दी। आओ हम सब मिल परम पिता परमेश्वर से विनती करें की हमे छोड़ गई लता दी को अपने चरणों में शरण दे।

UPTV7 NEWS
भूपेंद्र सिंह

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