Advertisement

प्रयाग नारायण मंदिर शिवाला जहां विराजे हैं भगवान लक्ष्मी नारायण, 160वॉ श्री बैकुंठ उत्सव मनाया गया

दक्षिण भारतीय 160 वर्ष प्राचीन महाराज प्रयाग नारायण मंदिर शिवाला में श्री बैकुंठ उत्सव मनाया गया यह उत्सव प्रति वर्ष पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी से पूरनमासी तिथि तक मनाया जाता है। उत्सव का मुख्य आकर्षण विशेष मंत्रोचारण संस्कृत एवं तमिल भाषा के साथ प्रथम दिन एकादशी को बैकुंठ द्वारा जो कि प्रति वर्ष एकादशी से पूर्णमासी तिथि तक खुला रहता है असंख्य भक्तगण भगवान श्री बैकुंठ नाथ से भव्य स्वर्ण सिंहासन को कंधे पर रख कर इसी बैकुंठ द्वार से बाहर आये साथ मे दक्षिण भारत के चार आचार्यो अलवार के रजत सिंहासन भी रहे। यह स्वर्ण सिंहासन शिवाला मंदिर प्रांगण की लगभग ढाई घंटे आरती एवं विशेष निर्मित अंग वस्त्रम एवं प्रसाद का सामूहिक वितरण करते हुए परिक्रमा हुई। यह महोत्सव आम जनमानस में बड़े पेड़े वाला उत्सव के नाम से चर्चित है। उत्तर भारत मे वृन्दावन के अलावा कानपुर में इसी मंदिर में देखने को मिलता है। आम जनता ने इसी अवसर पर आज दिन भर बैकुंठ द्वार से अन्दर आकर एवं लौटकर अपनी आस्था प्रकट की। यह विशेष बैकुंठ द्वार अगामी पांच दिन तक खुला रहेगा। उत्सव मंदिर के युवा प्रबंधक अभिनव नारायण तिवारी एवं अध्यक्ष विजय नारायण तिवारी मुकुल के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। इस उत्सव में वृन्दावन, गोरखपुर, नैमिषारण्, एव अयोध्या आदि से अनेक भक्त एवं आचार्यो ने भाग लिया। मध्यान्ह एकादशी का भंडारा संम्पन्न हुआ जिसमें दही पेड़ा एवम फलहारी प्रसाद का सामूहिक वितरण हुआ। प्रमुख रूप से बद्रीनारायण तिवारी, राजेन्द्र प्रसाद पांडेय, विनोद कुमार दीक्षित, संजय सिंह, गोबिंद शुक्ला, अविनाश चंद्र बाजपेयी, राकेश तिवारी, मनोज सेंगर, कनिष्ठ पाण्डेय, महेश मिश्रा, मंदिर व्यास करुणाशंकर रामानुज दास प्रधान अर्चक आचार्य पं सूरजदिन, आचार्य पं अश्वनी, आचार्य पं अनुराग आदि रहे।

Editor In Chief-Naresh Singh

WhatsApp Image 2023-11-24 at 3.32.09 PM
Navratri special offer at Deepak EV
admin1