दक्षिण भारतीय 161 वर्ष प्राचीन महाराज प्रयाग नारायण मंदिर शिवाला में परम्परागत रंगभरी एकादशी होली का उत्सव भगवान लक्ष्मीनारायण के सम्मुख भक्तो द्वारा बड़े उल्लासपूर्ण वातावरण में संम्पन्न हुआ।घंटा – नगाड़ो के थाप के साथ संध्या आरती के समय जयकारो के उदघोष के साथ आचार्य सूरजदीन प्रधान पुजारी ने श्रृंगार के पट खोले। भगवान लक्ष्मीनारायण भूदेवी, श्री देवी, लीला देवी के साथ हाथ में रजत पिचकारी से होली खेलते हुए भक्तो को दर्शन दे रहे थे। यह होली का विशेष श्रंगार अनुराधा नक्षत्र के एक दिन पूर्व तक रहता है। इस अद्भुत श्रंगार से पूरा वातावरण होली उत्सव से सराबोर सुगंधित रंग बिरंगे अबीर-गुलाल और फूलो की बौछार के साथ झांझर – ढोलक की थाप में फ़ाग-होली के गीते एवं भजनों से वातावरण भक्तिमय हो गया भजन के बोल होली खेली लक्ष्मीनारायण भू श्री लीला संग, भक्तो चलाओ फूल और रंग भगवान के संग, नैनन में पिचकारी दाई, चलत गुलाल अवीर, होली खेलत रघुवीरा, होली में मेरे लग जायेगी। सभी आने जाने वाले भक्तों को शाही ठंडाई एवं गुझिया महाप्रसाद के रूप में बाटा गया। होली महोत्सव प्रबंधक अभिनव नारायण तिवारी एवं विजय नारायण तिवारी मुकुल की देखरेख में कोरोना गाईडलाइन का पालन करते हुए संम्पन हुआ। मुख्य रूप से उपस्थित रुचि पुरखिन, सुनीता, कुसुम, पंजाबी आंटी, कामना तिवारी, रश्मि, प्रमिला, रमा, किरन वर्मा, शुशीला, गुड़िया, शीला, मनोरमा, सुषमा, नन्नेश, संगीता, देवेंद्र द्विवेदी, मुन्ना पांडेय, विनोद कुमार दीक्षित आदि।
महाराज प्रयाग नारायण मंदिर की रंगभरी एकादशी होली उत्सव


















