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छोटे व मध्यमवर्गीय व्यापारी और अभिभावक बजट से निराश : अभिमन्यु गुप्ता

व्यापारी के लिए ये बजट निराशाजनक है।थोड़ी खुशी, और ज्यादा गम का मिश्रण है ये बजट।इस बजट में व्यापारी के लिए कुछ नहीं है।एमएसएमई समेत हर व्यापारी उम्मीद बांधे बैठा था।व्यापारी भी किसानों की तरह समर्थन और मदद चाहता था।बिना महंगाई को नियंत्रित किए और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को बांधे या उन पर लगाए जा रहे टैक्स को कम किए,इनकम टैक्स की 5 की जगह 7 लाख तक की छूट शून्य ही साबित होगी।जो कुछ भी इस छूट में बचेगा वो महंगाई में खप जाएगा।सरकार ने मोटा अनाज वर्ष घोषित किया है पर मोटा अनाज पर टैक्स खत्म या कम नहीं किया।अनाज,खाद्य सामग्री व पैक्स फूड, आटा,दूध,दही आदि पर जीएसटी में कोई राहत नहीं मिली।वन नेशन वन टैक्स के वादे के बावजूद इस बार भी पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में नहीं लाया गया।सोने चांदी को महंगा करके हर घर को चोट पहुंचाई गई है।व्यापारी तो परेशान होगा ही पर आम जन विशेषकर महिलाएं परेशान होंगी। मध्यमवर्गीय परिवारों को छूट के नाम कर जो कुछ राहत नाममात्र मिलेगी वो महंगाई पर कोई कदम न उठाकर शून्य हो जाएगी।व्यापारी समाज विसंगतिपूर्ण जीएसटी में राहत के साथ ही मेडिक्लेम की उम्मीद कर रहा था।इलाज बहुत महंगा हो गया है।व्यापारी कई वस्तुओं पर जीएसटी में सहूलियत चाहते थे जो नहीं मिली।व्यापारी जीएसटी में कई राहत चाहते थे पर कुछ नहीं हुआ।महंगी किताबों से अभिभावक राहत की सोच रहे थे,उनके लिए भी कोई मदद नहीं है।ग्रामीण अंचल के छोटे कुटीर व्यापारियों के लिए भी कुछ नहीं है।

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