कानपुर की एक ऐसी संस्था जो लगातार पिछले 25 सालों से भारतीय संस्कृति की कला भरतनाट्यम को लगातार बढ़ाने का काम कर रही है। कला के क्षेत्र में और नृत्य के लिए मंच देने वाली एक ऐसी संस्था जिसने सैकड़ो कलाकारों को आगे बढ़ाया। संस्था के 25 वर्ष पूरे होने के चलते तीन दिवसीय भरतनाट्यम नृत्य प्रस्तुति का कार्यक्रम शहर में किया जा रहा है। प्रथम दिवस 6 अक्टूबर की संध्याकाल से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। 8 अक्टूबर रविवार तक कार्यक्रम में देश के अलग-अलग शहरों से आए नृत्यांगनाओं के द्वारा कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे।
शहर में कलानिधि संस्था ने शास्त्रीय नृत्य के मार्ग में अग्रसर नृत्यांगनाओ को उचित मार्गदर्शन प्रदान करने का काम किया। पिछले 25 वर्षों से लगातार संस्था काम कर रही है ,ऐसे कलाकारों को मंच प्रदान करने के लिए तीन दिवसीय कार्यक्रम कानपुर में शुरू किया गया। दर्शिका राव ने इसकी शुरुआत शहर की राघवेंद्र स्वरूप ऑडिटोरियम में शास्त्रीय नृत्य की खनक व संगीत की स्वलहरियों द्वारा अत्यंत सुंदर स्वरूप प्रदान करने का काम किया।
शुक्रवार की शाम 7 बजे से शुरू हुए इस कार्यक्रम में रात्रि 10:30 बजे तक भरतनाट्यम से जुड़े नृत्य की प्रस्तुति बनारस, आगरा ,नोएडा ,दिल्ली से आए नृत्यांगनाओ ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के पहले दिन मुख्य रूप से आकर्षण का केंद्र नटराज को समर्पित कीर्ति, नटखट कान्हा के लिए मां यशोदा का वात्सल्य प्रेम, तुलसीदास के प्रसिद्ध भजन ठुमक चलत रामचंद्र को लयबद्र कार्यक्रम को पसंद किया गया । राग बिहाग में तिलहाना की प्रस्तुति अत्यंत सराहना हुई । कार्यक्रम का समापन पारंपरिक विधि द्वारा देवता गुरु व सभागार में उपस्थित सभी गणमान्य कला प्रेमियों को प्रणाम कर मंगल श्लोक द्वारा किया गया। साथ ही बेंगलुरु से पधारे चित्रासी दासरथी विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में पहुंची और प्रस्तुत कार्यक्रमों की सराहना की।


















