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आचार्य श्री के देह परिवर्तन पंचतत्व विलीन हो जाने पर विनयांजली सभा का आयोजन किया गया

कानपुर में विराजमान आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 सुधा सागर जी महाराज एवं छुल्लक श्री 105 गंभीर सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य मे आज आचार्य श्री के देह परिवर्तन पंचतत्व विलीन हो जाने पर विनयांजली सभा का आयोजन किया गया। जिसमे मंच संचालन पं. सुमित जी शास्त्री कानपुर ने बताया कि आचार्य श्री दुरगामी सोच के साथ भारत में फैल रही सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए हमेशा अग्रसर रहे। उन्होंने भारत को भारत कहा जाए इण्डिया नहीं इस पर विशेष जोर देते हुए गौ सेवा की ओर दृष्टि रखते हुए सम्पूर्ण भारत में 160 से अधिक गौशालाओं की प्रेरणा दी। एवं भारत फिर से विश्व गुरु की ओर अग्रसर हो।इसके लिए खादी को महत्व देते हुए हथकरधा केंद्रो की प्रेरणा दी।
इसी क्रम मे भक्तो ने अपनी विनयांजली गुरु जी के चरणों में समर्पित की।पुज्य मुनि जी ने आचार्य श्री के कई संस्मरणों के माध्यम से अपने पूज्य गुरुवर को याद किया एवं सम्पूर्ण संघ के साथ समाज के कई लोगों ने इस दुःख के क्षण में उपवास रखकर अपने गुरु के प्रति गुरुभक्ति समर्पित की।
इस अवसर पर कमलेश जी पाडिया, डा. अनूप जैन देशमा सौरभ जैन, भूपेन्द्र जैन, अमित जैन क़त्थे वाले, संजय जैन, गौरव जैन, अनिल जैन, आमोद जैन, संजय जैन, सुनील भन्नु जैन, मनीष जैन ‘मोनू’ संजीव जैन (नेताजी) आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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