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डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की कार्रवाई पर उठे सवाल! आखिरकार बिना आरोप पत्र के कैसे कर दिया गया एसीएमओ समेत कई अधिकारियों को सस्पेंड

चेतन गुप्ता / एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
 कानपुर से बड़ी खबर

 स्वास्थ्य विभाग में बगैर चार्जशीट सस्पेंशन पर बवाल!

डिप्टी सीएम बृजेश पाठक की सख्त कार्रवाई पर उठने लगे सवाल –
बिना आरोप पत्र, बिना प्राथमिक जांच एसीएमओ सहित कई अधिकारियों को किया गया निलंबित। क्या जल्दबाजी में उठाया गया यह कदम फिर बनेगा विभाग की किरकिरी का कारण?

 पहले भी हुई है फजीहत –
सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी को भी बिना चार्जशीट निलंबित करने पर हाईकोर्ट से मिली थी राहत। अब फिर दोहराई गई वही गलती?

 CMO नेमी की जांच रिपोर्ट पर सवाल –
जिन तथ्यों के आधार पर कार्रवाई हुई, क्या वह जांच निष्पक्ष थी? भ्रष्टाचार और अनियमितता के नाम पर जिस रिपोर्ट के आधार पर डिप्टी सीएम ने फैसला लिया, अब उसी की जांच में नए खुलासे।

 RTI से बड़ा खुलासा –
JM फार्मा को टारगेट करने की पूर्व नियोजित साजिश!
बिना लैब जांच के मेडिकल सामग्री को “घटिया” घोषित किया गया।

 रिपोर्ट में हेराफेरी के आरोप –
जांच कमेटी ने केवल हस्ताक्षर किए, रिपोर्ट डॉ. नेमी के दबाव में तैयार की गई – आरटीआई से हुआ बड़ा खुलासा।

ACMO स्टोर डॉ. आरपी मिश्रा और तत्कालीन CMO डॉ. उदयनाथ की जांच रिपोर्ट पर भी अब उठ रहे सवाल।
डॉ. मिश्रा, जो क्रय समिति के सदस्य भी रहे, वही जांच कमेटी के भी सदस्य, RTI में स्वीकार किया – रिपोर्ट बनी CMO के प्रभाव में।

 सवाल –
डॉ. नेमी किसके इशारे पर कर रहे थे कार्रवाई?
JM फार्मा और मालिक राजेश शुक्ला के मानसिक, आर्थिक व शारीरिक उत्पीड़न की कहानी आई सामने।

 अब सबसे अहम सवाल –
क्या RTI से उजागर हुई साजिश पर होगी निष्पक्ष जांच?
क्या सरकार डॉ. नेमी की भूमिका पर लेगी संज्ञान?

 पीड़ित की मांग –
“सरकार करे हस्तक्षेप, डॉ. हरिदत्त नेमी पर हो कड़ी कार्रवाई”

यह मामला अब सिर्फ निलंबन का नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सीधा सवाल बन गया है। RTI से मिले तथ्यों ने यह साबित कर दिया है कि कहीं न कहीं गहरे में कुछ सड़ चुका है। अब देखना होगा कि सरकार इस साजिश पर क्या रुख अपनाती है।

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