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अशुद्धि का अंत और लोभ -कषाय का अभाव ही उत्तम शौच धर्म है

स्वर्ण जैन मन्दिर श्री दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मन्दिर जनरलगंज मे आज प्रातःकाल श्री जी जलाभिषेक-नित्यनियम पूजा-पाठ-शान्तिधारा के साथ-साथ तीर्थकर पुष्पदन्त भगवान का मोक्ष कल्याण बडी धूमधाम एवं उत्साह से साथ मनाया गया । महायज्ञ नायक भामाशाह गुरूभक्त प्रदीप जैन जी के सुपौत्र आस्ट्रेलियाई से आऐ धार्मिक जैन ने प्रथम शान्तिधारा करने का सौभाग्य प्राप्त किया,अपने जन्मदिन के शुभ अवसर अभिषेक जैन सुपुत्र राजेश जैन ने ध्दितीय तृतीया अंकुर जैन सुपुत्र सुभाष जैन ने की। उसके उपरान्त श्रेयासं जैन के भजनो के माध्यम से सभी पुरूषो एवं महिलाऐ ने भाव नृत्य के माध्यम से लाडू अर्पण किया गया ।

सन्दीप जैन ने बताया कि दस लक्षण का जैन समाज मे किऔना महत्व है कि कोई भी छोटे से छोटा बच्चा ही क्यो न हो 10 दिन स्कूल जाने से पूर्व मन्दिर अवश्य दर्शन करेगे , बाजार की कोई भी खान-पान की चीज नही खाते है । यह संस्कार हर माता-पिता अपने बच्चो को प्रथम दिन से देते है । तपाचायॆ अन्तमॆना 108 प्रसन्न सागर जी माध्यम उत्तम शौच का महत्व बताऐ
जो आंतरिक निर्मलता का भाव ही उत्तम शौच धर्म है ।
विशाल जैन ने बताया कल सायंकाल सांस्कृतिक कार्यक्रम महावीर देशाना मंडल के ध्दारा कुण्डलपुर की गाथा से बडे बाबा का छोटे बाबा का मिलन नृत्य नाटिका के माध्यम से मान्या जैन , वोरवी जैन ने लव-कुश की भूमिका मे कुण्डलपुर गाथा गीऔ के रूप मे सुनाई जिसमे अंहम जैन, संभव जैन ,धैय जैन,संजोलीजैन ,भूमि जैन ने भाव नृत्य के माध्यम प्राचीन मनिदर से नवीन मन्दिर का निर्माण शिरोमणी आचार्य 108 विधासागर सागर जी महाराज की प्रेरणा से ऐतिहासिक चमत्कारिक निर्माण हुआ । मण्डल की महिलाऐ संजौली जैन ,नेहा जैन , मिनाक्षी जैन,रूचि जैन , सिल्की जैन , शिवानी जैन , मिल्कि जैन , सेफाली जैन आदि उपस्थित थी ।

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