कानपुर में जोड़ों के दर्द से परेशान हजारों मरीजों के लिए राहत की खबर है। शहर के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक चिकित्सक डॉ. रवि गर्ग का कहना है कि घुटनों और जोड़ों के दर्द को लोग अक्सर उम्र का हिस्सा मानकर सहते रहते हैं, जबकि सही इलाज से फिर से सामान्य जीवन जिया जा सकता है।
डॉ. रवि गर्ग ने एक 64 वर्षीय बुज़ुर्ग महिला का उदाहरण देते हुए बताया कि पिछले कई वर्षों से उनका हर दिन दर्द के साथ शुरू और खत्म होता था। कुछ सीढ़ियाँ चढ़ना, रसोई में खड़े होना या बालकनी तक चलना भी उनके लिए असहनीय हो गया था। कभी सक्रिय रहने वाली यह दादी धीरे-धीरे पारिवारिक समारोहों, त्योहारों और यहाँ तक कि सुबह की प्रार्थना से भी दूर हो गईं—इसलिए नहीं कि वे ऐसा चाहती थीं, बल्कि इसलिए कि उनके घुटनों ने उनका साथ छोड़ दिया था।
कानपुर के हजारों मरीजों की तरह, उन्हें भी यही लगता था कि जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी सिर्फ अमीरों के लिए है। इलाज का खर्च इतना ज्यादा माना जाता था कि दर्द के साथ जीना ही एकमात्र विकल्प लगने लगा था।
लेकिन अब इस सोच को बदलने की पहल शुरू हो चुकी है।
स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए उजाला सिग्नस नोबल सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ने किफायती ऑर्थोपेडिक जॉइंट रिप्लेसमेंट पैकेज की शुरुआत की है। यह पैकेज ₹60,000 से शुरू, साथ में इम्प्लांट की लागत पर आधारित है। इस पहल का उद्देश्य उन मरीजों को फिर से चलने-फिरने की आज़ादी, आत्मनिर्भरता और सम्मान लौटाना है, जो वर्षों से चुपचाप दर्द सह रहे थे।
वही डॉ. रवि गर्ग (सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन) ने कहा
“जोड़ों का दर्द कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसे सहकर ही जिया जाए। सही समय पर इलाज और आधुनिक तकनीक से मरीज दोबारा सामान्य जीवन जी सकते हैं। किफायती जॉइंट रिप्लेसमेंट से अब आर्थिक मजबूरी इलाज में बाधा नहीं बनेगी।”
वही डॉ. अनिल जैन ने कहा
“हमारा उद्देश्य यह है कि हर वर्ग का मरीज बेहतर ऑर्थोपेडिक इलाज तक पहुंच सके। कम लागत में जॉइंट रिप्लेसमेंट से बुज़ुर्ग मरीजों का आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता दोनों बेहतर हो रही हैं।”
कानपुर से भूपेन्द्र सिंह की रिपोर्ट


















