बचाव पक्ष का दावा—किराएदारी विवाद में फंसाने का आरोप, कोर्ट में पीड़िता ने बदले बयान
कानपुर। बजरिया थाना क्षेत्र से जुड़े दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के करीब दो साल पुराने मामले में अदालत ने सऊद, दाऊद, शाहजहां बेगम और मेहदी हसन को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनन्त शर्मा के मुताबिक, मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन के आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य सामने नहीं आए।
अधिवक्ता ने बताया कि 16 अगस्त 2022 को बजरिया थाने में मुकदमा संख्या 99/2022 दर्ज किया गया था। इसमें सऊद, उसके भाई दाऊद, मां शाहजहां बेगम और यतीमखाना प्रबंधक मेहदी हसन के खिलाफ दुष्कर्म, छेड़छाड़ और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था।
बचाव पक्ष के अनुसार, मुकदमे की सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अदालत में अपने बयान में कहा कि सऊद और दाऊद उसके भाई जैसे हैं और उन्होंने उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया। उसने कथित तौर पर यह भी बताया कि यतीमखाने की एक कर्मचारी के कहने पर उसने कागजों पर बिना पढ़े हस्ताक्षर किए थे तथा दबाव में पहले बयान दिए थे।
अधिवक्ता के मुताबिक, अदालत में मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि करने वाला साक्ष्य नहीं मिला। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि कथित घटना वर्ष 2015 की बताई गई, जबकि एफआईआर वर्ष 2022 में दर्ज हुई और उसमें घटना की स्पष्ट तारीख व समय का उल्लेख नहीं था। साथ ही, पीड़िता की उम्र से संबंधित पुख्ता दस्तावेज विवेचना में शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाए गए।
बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि आरोपियों को मकान की किराएदारी से जुड़े विवाद के चलते मामले में फंसाया गया था। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहियों और बचाव पक्ष के तर्कों पर विचार करने के बाद चारों आरोपियों को आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
मोहम्मद आमिर की रिपोर्ट


















