छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक जी की प्रेरणा से श्रीमद्भगवद्गीता, वैदिक वाङ्मय शोधपीठ एवं इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स के संयुक्त तत्वावधान में ‘वाणी, व्यक्तित्व एवं व्यवसाय’ तथा ‘स्वर शास्त्र और समय’ विषयक दो सत्रीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
प्रथम सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक जी ने की। उन्होंने कहा कि प्रभावशाली स्वर एवं वाणी एक विशिष्ट कला है और जिन व्यक्तियों में यह प्रतिभा होती है, उन पर मां सरस्वती की विशेष कृपा मानी जा सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों को वाणी एवं व्यक्तित्व विकास के लिए निरंतर अभ्यास करने की प्रेरणा दी।
द्वितीय सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक जी ने की। उन्होंने प्रसिद्ध वॉइस आर्टिस्ट हरीश भीमानी जी के स्वर की विशिष्टता का उल्लेख करते हुए कहा कि महाभारत में ‘मैं समय हूँ’ के स्वर के माध्यम से उन्होंने जन-जन में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उन्होंने ऐसे विलक्षण स्वर के धनी व्यक्तित्व की विश्वविद्यालय में उपस्थिति को सौभाग्य बताया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरीश भीमानी जी ने विद्यार्थियों को प्रभावी वाणी, संवाद-कला एवं स्वर के व्यक्तित्व पर प्रभाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने वॉइस आर्ट, एंकरिंग, डबिंग, विज्ञापन, रेडियो एवं टेलीविजन सहित विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार एवं व्यवसाय की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर देते हुए उन्होंने स्वर-कला से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं को सरलता से समझाया।
इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स के निदेशक डॉ. मिठाई लाल जी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि स्वर में वह शक्ति है, जो शब्दों के माध्यम से किसी कहानी या भाव का चित्र श्रोता के मन में साकार कर सकती है।
इस अवसर पर महाबिद्यालय समन्वयक डॉ.राजेश कुमार द्विवेदी, डॉ. उमेश पालीवाल, अनिल कुमार गुप्त सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. अमित कुमार, निदेशक, सामाजिक विज्ञान विभाग ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में प्रो. शुभम शिवा, डॉ. राज कुमार सिंह, जे.बी. यादव, डॉ. मंतोष यादव, विनय सिंह, तनीषा वधावन, डॉ. रणधीर सिंह, डॉ. विजय त्रिपाठी, प्रिया मिश्रा, कीर्ति वर्मा , डा के के शुक्ला, राज़ेश शुक्ला, दिलीप कुमार मिश्रा, मनीष दीक्षित सहित अन्य शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
वाणी, व्यक्तित्व एवं व्यवसाय कार्यक्रम में हरीश भीमानी ने विद्यार्थियों को बताई स्वर-कला की बारीकियाँ


















