कानपुर :- जमीअत उलमा शहर कानपुर के ज़ेरे एहतमाम नशा मुक्त शहर, नशा मुक्त समाज मुहिम के तहत मनाये जा रहे नशा विरोधी अभियान सप्ताह का आग़ाज़ अशरफाबाद जाजमऊ से मौलाना मुबीनुल हक़ चौक(पुरानी चुंगी) तक बाद नमाज़ जुमा नशा मुखालिफ रैली निकालकर किया गया जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शिर्कत करके नशे से होने वाले नुक़्सानों से लोगों को जागरूक किया गया।
रैली के अन्त में जमीअत उलमा शहर कानपुर के महासचिव व प्रदेश उपाध्यक्ष मौलाना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह क़ासमी ने खिताब करते हुए कहा कि 1965 में फ्रांस में एक सर्वे रिपोर्ट आई थी कि अगर शराब व मादक पदार्थां का इस्तेमाल बिल्कुल बंद कर दिया जाये तो देश के आधे बंदीगृह ज़रूरत ना होने के कारण खुद ब खुद बंद हो जायेंगे और अस्पताल में मरीज़ों की अधिकता पर का़बू पा लिया जायेगा, स्वास्थ्य पर होने वाले व्यय में कमी आ जायेगी। यह रिपोर्ट इतने वर्षां पहले की है कि उस वक़्त मादक पदार्थां के प्रयोग की अधिकता वर्तमान के मुक़ाबले बहुत कम थी। इस वक़्त अगर सिर्फ कानपुर का सर्वे कराया जाये तो इसके परिणाम से पता चल जायेगा कि दुष्कर्म, , चोरी, घरेलू झगड़े, सड़क हादसे आदि की अहम वजह नशा है। इस्लाम में शराब को ‘‘उम्मुल खबाइस’’ अर्थात बुराइयों की जड़ कहा गया है क्योंकि इसके बाद आदमी मदहोश होकर कब कौन सा गुनाह कर बैठे इसका पता नहीं।
रैली में नशा विरोधी नारे लिखे हुए बैनर लेकर लोग आगे-आगे चल रहे थे जिसमें लिखा था ‘‘नशा एक समाजी बुराई, नशा इंसानों को हैवान बनाने का ज़रिया, नशा अपराध बढ़ने का कारण, नशा खानदानों को बर्बादी की तरफ ले जाने वाला, नशा अक़्ल व होश का दुश्मन।’’ रैली के अन्त में मौलाना अब्दुल्लाह ने मौजूद लेगों से हाथ उठवाकर अपने अपने तौर पर कानपुर को नशे से पाक शहर बनाने के लिये संघर्ष करने की शपथ दिलाई। शपथ में कहा कि ‘‘हम अपने देश, अपने शहर, अपने घर के साथ-साथ खुद को भी शराब के इस्तेमाल, स्मैक, चरस, भांग और नशीली दवाआें और इंजेक्शन से बचाएंगे।
कानपुर से मोहम्मद नईम की रिपोर्ट


















