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कानपुर विकास प्राधिकरण का कर्मचारी बना भाजपा का पदाधिकारी

कानपुर विकास प्राधिकरण का कर्मचारी बना भाजपा का पदाधिकारी

कानपुर विकास प्राधिकरण से भवन की फ़ाइल चोरी नही हुई आरोपी पर कार्यवाही

निष्पक्ष चुनाव पर लगा प्रश्न चिन्ह

भाजपा के पदाधिकारी सरकारी कर्मचारी बनकर कराएंगे चुनाव

भाजपा नेता की शह पर हुई थी पत्रकारो से बदसलूकी

कानपुर- आखिर उपाध्यक्ष कानपुर विकास प्राधिकरण मदान्त क्यूँ ना हो,जब उनके अधीनस्थ कर्मचारी सत्तारूढ़ भाजपा के पदाधिकारी हों,इसी कारण उपाध्यक्ष विकास प्राधिकरण नगर के अपने वरिष्ठ अधिकारियों की भी नहीं सुनते,साथ ही पत्रकारों से भी बदसलूकी कर भ्रष्टाचार को संरक्षित कर रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कानपुर विकास प्राधिकरण में कार्यरत एक बाबू जिसके पास कॉलोनी का प्रभार है वह केंद्र और प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के जिले का पदाधिकारी है।इतना ही नहीं इस बाबू के द्वारा फाइलों में हेरफेर कर अवैध तरीके से कई कालोनी दूसरों के नाम हस्तांतरित की गई।
साथ ही इस सरकारी कर्मचारी/भाजपा नेता की शह पर विभाग के अन्य कर्मचारी भी खुलकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं जिनके आगे कानपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष भी नतमस्तक रहते हैं।
सूत्रों के अनुसार भाजपा नेता/कर्मचारी विकास प्राधिकरण की शह पर ही इंदिरा नगर के भवन संख्या 16-एन-सी-1 की फाइल भी विभाग से चोरी की जा चुकी है जिसका मुकदमा थाना स्वरूप नगर में पंजीकृत हुआ था।उस फ़ाइल चोरी के आरोपी की भाजपा नेता से करीबी होने के कारण उपाध्यक्ष ने उस कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की। इन्हीं सब प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए कानपुर के पत्रकार कानपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अरविंद सिंह से सवाल कर रहे थे जिससे क्षुब्ध होकर अरविंद सिंह ने पत्रकारों के खिलाफ साजिश रचकर विभाग के एक कर्मचारी नेता प्रदीप पांडे के द्वारा पत्रकारों को अपशब्द व गाली-गलौज करवा दी,जिससे पत्रकार उग्र हो जाए और उपाध्यक्ष अरविंद सिंह को पत्रकारों पर झूठा मुकदमा लिखाने का बहाना मिल जाये, उपाध्यक्ष अरविंद सिंह की मंशा भापकर पत्रकारों ने संयम से काम लिया जिससे उपाध्यक्ष अरविंद सिंह का मंसूबा फेल हो गया।
अब प्रश्न यह उठता है कि क्या कोई सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक पार्टी का सदस्य/पदाधिकारी हो सकता है इन्ही सब कारणों को लेकर विभाग के एक अन्य कर्मचारी संगठन के नेता ने उपाध्यक्ष अरविंद सिंह की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगाया था। तो क्या भारत का चुनाव आयोग ऐसे ही सरकारी कर्मचारियों के दम पर निष्पक्ष चुनाव का दम भर रहा है जो किसी राजनीतिक पार्टी में पदाधिकारी हो

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