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जश्ने दस्तारबंदी का आयोजन, कुरान पढ़ो, नेक अमल करो

कानपुर, जश्न दस्तर हिफ्जुल कुरान, बेशक इल्म रोशनी और जहालत अंधेरा है लिहाजा जहालत से निकल कर शिक्षा की नूरानी हवाओं से अगर तुम अपनी जिंदगी गुजारना चाहते हो तो इल्म के ज़ेवर से सज जाओ तभी तुम जिंदगी के हर मोड़ पर कामयाब होगे।इल्म हासिल करने के लिए तुम्हारे सामने चाहे कितनी ही मुश्किलें क्यों न आएं तुम उन मुश्किलों से मुकाबला करते हुए हर हाल में इल्म हासिल करो। उक्त विचार मदरसा अरबिया रज्जाकिया मदीनतुल उलूम के तत्वाधान में आयोजित अजीमुशशान जश्ने दस्तर हिफ्जुल कुरान के जलसे को संबोधित करते हुए बरेली शरीफ से पधारे हज़रत मौलाना मुफ्ती रिज़वान ने व्यक्त किए। रिज़वान ने कहा कि मज़हबे इस्लाम तालीम से ज़्यादा आगे बढ़ने का नज़रिया पेश करता है। पैगंबरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफा पर जो पहली वही उतरी उसमे सबसे पहले पढ़ने की बात कही गई है इल्म एक ऐसा हथियार है जो तलवार से ज़्यादा तेज़ है, इल्म के जरिए ही इंसान हक और बातिल, अच्छाई और बुराई के दरमियान तमीज पैदा कर सकता है और इल्म से ही हमे अल्लाह को पहचानने का तरीका मालूम होता है।मौलाना जकारिया अशरफी ने कहा कि अगर हम अपने बच्चों को शिक्षा की डगर पर डाल दें तो ये कौम के रोशन चिराग़ होंगे और अगर तालीम न देकर गलत रास्ते पर डाला तो ये कौम व मुल्क की तबाही का सबब होंगे जिसका खामियाजा सिर्फ फर्दवाहिद को ही नहीं बल्कि पूरी कौम को भुगतना पड़ेगा हज़रत मौलाना मुफ्ती हनीफ बरकाती ने कहा कि इल्म के साथ अच्छे अमल अच्छे अखलाक और किरदार का होना जरूरी है।आज समाज में दहेज की लानत की वजह से निकाह जैसी आसान तकरीब मसला बनती जा रही है। दहेज की मांग करना इस्लाम में गैर शरई है, अपनी लड़कियों की शादी गरीबों के यहां करो लेकिन दहेज के लालचियो और भिखारियों के यहां मत करो।मुफ्ती हनीफ ने कहा समाज में फैली हुई बुराइयों को इस वक्त दूर कर सकते हैं जबकि हम शिक्षित होंगे समाज ने जुआं,शराब,दहेज की मांग,मां बाप की नाफरमानी बढ़ने का मुख्य कारण मुसलमानों का शिक्षित न होना है।
इससे पूर्व जलसे की शुरुआत तिलावते कुरान पाक से हाफिज व कारी हाफिज मुबस्शिर करीम ने की ओर बरगाहे रिसालत में कारी कलीम नूरी,इकबाल बेग क़ादरी,कलीम दानिश,यूसुफ रजा कानपुरी,हाफिज शौकत,मौलाना फरीद,हाफिज गुलाम जिलानी ने नात शरीफ पेश की।
जलसे की अध्यक्षता काज़ी ए शहर कानपुर मुफ्ती साकिब अदीब मिस्बाही, कयादत हाफिज अब्दुर्रहीम बहराइची व संचालन शब्बीर कानपुरी ने किया।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से मौलाना क़ासिम हबीबी,मौलाना सय्यद अकमल अशरफी,कारी अब्दुर रशीद,कारी एहसान,कारी मतलूब,कारी अनीस,मौलाना नूर आलम,कारी सफदर,हाफिज हसनैन, मौलाना फिरोज,हाफिज खुर्शीद,हाजी नसीम,हाजी मेहमूद आलम, इज़हार अहमद खान, हाजी आसिफ रईस,हाजी अतीक अहमद,हाजी मुबस्शिर,रईसउल हसन, अज्जू कुरैशी कारपोरेटर,हाजी वसीक,अब्दुल कलाम,मोहम्मद कैफ आदि उपस्थित रहे।

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