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अपने गुनाहों से तौबा करने की रात है शबे बरात

कानपुर, शाबानुल अज्म सरवरे कायनात का महीना शबे बरात हिक्मत व बरकत वाली रात है इसी रात हिक्मत के सारे काम बांट दिए जाते हैं कि अगले साल कौन जिंदा होगा, किसको मौत आयेगी। कौन अल्लाह की रहमतों का हकदार और कौन मेहरूम होगा। किसका कारोबार तरक्की और किसे खसारा का सामना करना पड़ेगा, शबे बरात की रात फरिश्तों के सुपुर्द किए जाते हैं इसलिए हमे 14,15 शाबान का रोज़ा रखने के साथ अल्लाह की रहमतों व बरकतो का सवाल करना चाहिए।
उक्त विचार मौलाना मोहम्मद क़ासिम हबीबी इमाम व खतीब जामा मस्जिद शफियाबाद चमनगंज ने मदरसा रज्जाकिया मदीनतुल उलूम बांस मंडी में आयोजित जलसा फजीलत शबे बरात को खिताब के दौरान व्यक्त किया। मौलाना ने बताया शाबानुल अज्म पैगंबर इस्लाम का महीना और नबी से सच्ची मोहब्बत का तकाज़ा है कि इस महीने की कद्र इबादात और रमजानुल मुबारक के इस्तकबाल की तैयारी में की जाए। शबे बरात का मतलब गुनाहों से निजात की रात है जिसमे सच्चे दिल से तौबा करने वालो को अल्लाह ताला माफ फरमाता है इस शब गुरूब आफताब से तुलुअ आफताब तक अल्लाह अपने बंदों पर खास निगाह फरमाता और जो मांगा जाए अता करता है। बीमारियों को शिफा,मुसीबत जदो को आसानी और तमाम परेशानियों से निजात मिलती है मौलाना ने बताया की 14 शाबान को बंदों का नामाए आमाल बंद और 15 शाबान को खोल दिया जाता है इसलिए भलाई के तलबगार को चाहिए कि वो 14,15 शाबान को रोज़ा रखने के साथ नेक आमाल में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लें। मौलाना ने बताया कि शबे बरात में सारे हिक्मत के काम बांट दिए और किसके साथ अगले साल क्या मामला होगा की जिम्मेदारी फरिश्तों के सुपुर्द की जाती है। मौलाना ने बताया कि जो शख्स शाबान का एक रोज़ा रखता है वो जन्नत में हज़रत यूसुफ का पड़ोसी होगा और उसके नामाए आमाल में हज़रत अय्यूब, हज़रत दाऊद जैसी इबादात का सवाब लिखा जायेगा। इस मौक़े पर मदरसे से हिफ्ज़ कुरान करीम की सआदत हासिल करने वाले तलबा की इज्ज़त अफजाई की गई।
इससे पूर्व जलसे की शुरआत तिलावते कुरान पाक से हाफिज मोमिन ने की और बारगाहे रिसालत में हाफिज मोहम्मद अहमद,जाने आलम,मोहम्मद कैफ,मोहम्मद सैफ ने नात शरीफ पेश की।इस अवसर पर मदरसे के प्रधानाचार्य हाफिज अब्दुर्रहीम बहराइची,मौलाना फिरोज,हाफिज खुर्शीद,अब्दुल कलाम, इज़हार अहमद खान,हाफिज नेमत उल्लाह, अब्दुल हमीद,मोहम्मद फारूक,हाफिज जावेद,शाकिर सुपर लाईट,इत्यादि लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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