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मित्रता की मिशाल थे महाराजा गुह राज निषाद

एकलव्य जन कल्याण महासभा, कानपुर के तत्वाधान में प्रभू राम के बाल सखा महाराजा गुहराज निषाद एवं ऋषियों में श्रेष्ठ महर्षि कश्यप जयन्ती का आयोजन बहुत धूम धाम से निषाद पार्क गंगा बैराज कानपुर में मनाया गया। पूर्व की भाँति इस वर्ष भी 40 फिटी हनुमान मन्दिर बिठूर कानपुर से भव्य शोभा यात्रा का आयोजन किया गया। शोभा यात्रा का शुभारम्भ प्रातः 10 बजे बिठूर के महान सन्त स्वामी अदूतानन्द जी ने हरी झण्डी दिखा कर किया। शोभा यात्रा का मुख्य उद्देश्य गाँव-गाँव भ्रमण कर शिक्षा का प्रचार बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं, जल बचाओ जीवन बचाओं, नशा व जुआ मुक्त समाज का निर्माण प्रमुख रूप से रहे। शोभा यात्रा बिठूर से आरम्भ होकर रमेलनगर, बांकरगंज हिन्गूपुर, ईश्वरीगंज, हृदयपुर, सिंहपुर, प्रतापपुर, हिन्दूपुर, ख्योराकटरी, धनऊपुरवा, चिड़ियाघर चौराहा, ज्योरा होते हुए कार्यक्रम स्थल निषाद पार्क, गंगा बैराज पहुँची शोभा यात्रा का जगह-जगह भव्य स्वागत क्षेत्रीय लोगों द्वारा किया गया।

कार्यक्रम स्थल गंगा बैराज पर जयन्ती का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री जे०के० वर्मा पूर्व सहायक निदेशक माध्यमिक शिक्षा, उ०प्र० ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम में महाराजा गुह राज निषाद एवं महर्षि कश्यप के चित्रों पर मार्ल्यापण कर आरती की गयी। कार्यक्रम में मेधावी छात्र-छात्राओं नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों, जिलापंचायत सदस्यों व समाज के विशिष्ट जनों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में प्रशिक्षित कलाकारों द्वारा उत्कृष्ट सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गये। कार्यक्रम में अपने उद्बोधन में मुख्य अतििथ श्री जे०के० वर्मा जी ने शिक्षा और संगठन पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा समाज को उन्नति की ओर ले जाने वाला पहला और अन्तिम मार्ग है। बिना शिक्षा के मानव पशु समान माना जाता है। शिक्षा ही सौ तालों की चाभी है। शिक्षा को कोई चारी नही कर सकता, कोई छीन नहीं सकता तथा कोई बंटवारा भी नहीं कर सकता। उन्होने उपस्थित जनसमूह से अपील की कि चाहे एक समय भोजन करो किन्तु बच्चों को शिक्षा अवश्य उच्च कोटि की देने हेतु अपना सर्वस्त न्योछावर कर दें उन्होंने कहा कि पढ़ने की कोई उम्र नही होती यदि अभिभावक शिक्षित नहीं है तो उन्हें भी समय निकाल कर शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए। उन्होने कहा कि संघे शक्ति कलयुगे अर्थात आज समय की माँग है कि अलग अलग टाइटल में बटा समाज एक होकर आगे बढ़े ओर हमारे पूर्वजों स्व० मनोहर लाल एवं स्व० बाबू कल्याण सिंह जी द्वारा आरम्भ किए गये आपस में रोटी बेटी के रिश्तों को आगे बढ़ाए तभी राजनीतिज्ञ लक्ष्य हासिल होगा और तभी समाज अपने न्यायोचित अधिकारों को प्राप्त कर पायेगा।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एकलव्य जनकल्याण महासभा के महामंत्री, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग उ०प्र० के सदस्य श्री रमेश वर्मा “एकलव्य ने अपने उद्बोधन में महाराजा गुह राज निषाद एवं महर्षि कश्यप पर संक्षिप्त प्रकाश डालते हुए कहा कि पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार प्रभू श्री राम एवं निषाद राज गुह की ऐसी मित्रता की दूसरी मिशाल नही मिलती है. मित्रता सबसे मजबूत रिश्ता है। उन्होंने गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित “भक्ती माल” उल्लिखित लेख का उल्लेख करते हुए बताया कि एक बार चारों युवराजों क्रमशः राम, भरत, लक्ष्मण व शत्रुघ्न के साथ निषाद राज गुह भी शिकार करने जंगल गये एक शेर को देख कर राम बोले इस शेर का शिकार मैं अकेले करूंगा कोई बीच में नही हस्ताक्षेप करेगा। शिकार दौरान शेर राम पर भारी पड़ने लगा तब निषाद राज गुह ने अपने धनुष वाण से शेर का बध कर दिया। चूंकि राम युवराज थे इसलिए उनकी आज्ञा का उल्लंघन राष्ट्र द्रोह हुआ। मामला राजा दशरथ के पास पहुँचा। राजा ने कहा कि तुम्हे राजाज्ञा के उल्लंघन हेतु मृत्यु दण्ड दियाजा सकता है तब निषाद राज गुह ने जवाब दिया कि मित्र के प्राणों की रक्षा करने हेतु यदि मुझे प्राण गवाने पड़े तो ऐसे सौ जीवन कुर्वान, इनके शब्द सुनकर राजा दशरथ अत्यन्त प्रसन्न हुए और उन्हें गले लगाकर राम से कहा कि ऐसा एक मित्र ही जीवन में मिलना बहुत सौभाग्य की बात है। इसी प्रकार की दो घटनाएं और भी रामायण में उल्लिखित है। उन्होंने सप्त ऋषियों में श्रेष्ठ महर्षि कश्यप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महर्षि कश्यप से ही सृष्टि की रचना हुई। राजा दक्ष की तेरह कन्याओं का विवाह महर्षि कश्यप से हुआ जिनसे ही मानव, दानव, जीव, जन्तु सबकी उत्पत्ति हुई ऐसा पुराणों के अवलोकन से जानकारी में आता है। पुराणों के अनुसार भगवान ब्रम्हा जी के मानस पुत्र मारीच के पुत्र है महर्षि कश्यप इससे स्पष्ट होता है कि हमारे समाज का गौरव शाली इतिहास ही हमारी भारतीय संस्कृति का मूल आधार है। हमें अपने अन्दर से दीन हीन भावना का त्याग कर शिक्षा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए संगठित होकर आगे बढ़ना होगा तभी 75 वर्षो से न्यायोचित आरक्षण हेतु निर्णायक लड़ाई लड़ी जा सकती है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री उदय राज निषाद सब इस्पेक्टर लखनऊ एवं श्री कृष्ण कुमार कश्यप सब इस्पेक्टर कानपुर ने नवजवानों का आवाहन कर कहा कि यदि अनुशासन में रहकर तैयारी की जाए तो कोई भी लक्ष्य असम्भव नहीं है। कार्यक्रम संयोजक श्री राम नारायण निषाद जी ने अपने उद्बोधन में कहा बाबा भीमराव अम्बेडकर जी कहते थे कि शिक्षा उस शेरनी का दूध है जिसे जो पीयेगा वह दहाड़ेगा, इसलिए हमारी समिति का लक्ष्य है समाज को अधिक से अधिक शिक्षित किया जाए। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष श्री सुखलाल निषाद जी ने की उन्होंने समिति की ओर से मुख्य अतिथि, विशिष्ठ अतिथि सहित सभी कार्यक्रम के सहयोगियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समिति का पहला लक्ष्य हासिल हो गया है कि हमारे भगवान महाराजा गुह राज निषाद की मनमोहक मूर्ति निषाद पार्क, गंगा बैराज पर स्थापित हो गयी है अब समाज के अन्य महत्वपूर्ण मुद्दो पर समिति आगे रणनीति बनाकर कार्य करेगी जिसमें आप सबका सहयोग आपेक्षित है।कार्यक्रम का सफल संचालन समिति के उपाध्यक्ष श्री राम सजीवन निषाद (लाला) ने किया अन्य वक्ताओं में प्रमुख रूप से सर्वश्री पन्ना लाल कश्यप, महावीर प्रसाद निषाद, श्रीमती किरन लोधी निषाद, सुरेश निषाद, ई० सुखलाल कश्यप, श्रीमती गीता निषाद, देवी प्रसाद निषाद, श्रीमती अर्चना निषाद, डा० अभिनव कुमार, श्रवण कुमार निषाद, ब्रज नारायण निषाद, नीरज निषाद, ई० आकाश वर्मा, पुत्तन लोधी, सिपाही लाल निषाद, राज कुमार निषाद, मुकेश कश्यप, अवधेश निषाद, दिनेश निषाद, सुनील, श्रवण कुमार (प्रथम). दिगम्बर निषाद, नरेन्द्र निषाद, रमेश निषाद, जे०पी० निषाद, देशराज निषाद, राम खिलावन निषाद, अरुणेश निषाद, सुशील कश्यप, राजेश कश्यप, राजू कश्यप, श्याम कश्यप आदि लोग उपस्थित रहे।

Reporter-Sagar Gupta

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