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तनाव मुक्ति व अखण्ड शांति हेतु ईश्वर शरणागती सर्वोत्तम

बिन सत्संग विवेक न होई ! हरि कृपा बिन सुलभ न सोई उपरोक्त चौपाई का दर्शन कराते हुए श्री एस.बी.के. भईया ने समाज को यह सन्देश दिया है। जिसमें यह अनुभूति हुई कि यदि जीवन को जानना चाहते हो तो दूसरों के लिये कष्ट सहन और त्याग ही धर्म जीवन का प्राण है। अध्यात्मिक आदर्श रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गाँधी, विनोवा भावे, डा. राधाकृष्णन, लोकमान्यतिलक, नानक, कबीर, तुलसी आदि हैं। श्री भईया जी का कहना है कि मैं अपने लिये नहीं अपनों के लिये हूँ। अपने वो हैं जो गरीब और वंचित हैं। स्वामी विवेकानन्द का एक बोधवाक्य हमेशा स्मरण रहता है ‘मैं उसी को महात्मा कहता हूं अन्यथा जिसका हृदय गरीबों के लिये रोता है अन्यथा वह तो दुरात्मा। स्वामी परमहंस रामकृष्ण के स्मरण में उनका बचनामृत अक्सर याद आता है कि ‘शालिग्राम से भी मनुष्य बड़ा है, प्रतिमा में उनका’ आर्विभाव होता है, और भला मनुष्यों में नहीं? भगवान से प्राप्त बुद्धि और बल के अनुसार वह सेवा में उतरते जा रहे हैं। श्री बृजेश तिवारी मुख्य संयोजक जी ने बताया कि आगामि रविवार दिनांक 17.04.2022 को कानपुर के फत्तेपुर क्षेत्र के निलकंठ गेस्ट हाउस में विशाल सत्संग का आयोजन होने जा रहा है। सत्संग में मुख्य वक्ता आध्यात्मिक अध्यापक श्री एस. बी. के. भईया के माध्यम से होना सुनिश्चित हुआ है। धर्मानुसार यज्ञ सरस्वती पूजन, भजन उपरान्त सत्संग का शुभारम्भ कर श्री एस.बी. के. जी ने अपने आध्यात्मिक सम्बोधन की शुरवात करी कि एक सधारण मानव को भगवान की पूजा करने के लिये अगल से समय या अन्य व्यवस्था की आवश्यकता नहीं होती यदि वहा स्वयं के हिस्से की ईमानदारी स्वयं के साथ निभाता है। तो यह सब से बड़ी सच्ची पूजा है। श्री एस. बी. के भईया ने कहा कि साहित्य समाज का आईना होता है अतः हम समाज को किन विचारों से पोषित कर रहें है। इस पर प्रति व्यक्ति की जिम्मेदारी होती है। उपरोक्त समागम में सम्बोधन उपरान्त भजन-कीर्तन व प्रसाद वितरण किया गया। मौके पर श्री बृजेश तिवारी, श्री पंकज तिवारी, श्री जितेन्द्र कुटलेहरिया, श्री हिमांशू ओमर, श्री दशरथ, राज जी, श्याम जी, अभिषेक तिवारी, शुभम, कति स्वाती, ज्योति, आदि गणमान्य उपस्थित रहें।

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